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तशरीह के साथ हदीसें

फ़ितरत पर आधारित सुन्नतें

9 हदीसें

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब रात में सोकर उठते, तो अपने मुँह को मिसवाक से रगड़कर साफ़ करते।

عَنْ حُذَيْفَةَ رضي الله عنه قَالَ: كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا قَامَ مِنَ اللَّيْلِ يَشُوصُ فَاهُ بِالسِّوَاكِ.
हुज़ैफ़ा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब रात में सोकर उठते, तो अपने मुँह को मिसवाक से रगड़कर साफ़ करते।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मिसवाक बहुत ज़्यादा करते और उसका आदेश दिया करते थे। कुछ-कुछ समयों में मिसवाक का महत्व और अधिक हो जाता है। मसनल, रात को सोकर उठते समय मिसवाक करना। अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब सोकर उठते, तो अपने मुँह को मिसवाक से रगड़कर साफ़ करते थे।

फ़ायदे
  1. रात की नींद से जागने के बाद मिसवाक का महत्व कुछ ज़्यादा ही है। क्योंकि सोने के कारण मुँह का स्वाद बदल जाता है और मिसवाक से सफ़ाई हो जाती है।
  2. पिछले अर्थ के आधार पर, मुँह के अंदर बद-बू पैदा हो जाने से, मिसवाक उपयोग करने का महत्व बढ़ जाता है।
  3. स्वच्छता सामान्य रूप से वांछित है। यह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत का हिस्सा और उच्च कोटि के शिष्टाचारों में से है।
  4. पूरे मुँह का मिसवाक करने में दाँत, मसूढ़े और ज़बान भी शामिल हैं।
  5. मिसवाक कहते हैं पीलू आदि की लकड़ी को, जिसे काटकर मुँह एवं दाँतों की सफ़ाई के लिए प्रयोग किया जाता है। इससे मुँह साफ़ होता है और दुर्गंध दूर होती है।
हवाला

صحيح البخاري (1/ 58) (245). صحيح مسلم (1/ 220) (255). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام (ص47). خلاصة الكلام شرح عمدة الأحكام، لفيصل آل مبارك (ص24).

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पाँच चीज़ें (मानव) प्रकृति (का हिस्सा) हैं ; ख़त्ना करना, नाभी के नीचे के बाल मूँडना, मूँछें छोटी करना, नाख़ून काटना और बग़ल के बाल उखाड़ना।

عن أبِي هريرة رضي اللَّه عنه: سمعتُ النبِيّ صلى الله عليه وسلم يقول: «الفِطْرَةُ خمسٌ: الخِتَانُ والاستحدادُ وقصُّ الشَّارِبِ وتقليمُ الأظفارِ وَنَتْفُ الآبَاطِ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को यह कहते हुए सुना है : "पाँच चीज़ें (मानव) प्रकृति (का हिस्सा) हैं ; ख़त्ना करना, नाभी के नीचे के बाल मूँडना, मूँछें छोटी करना, नाख़ून काटना और बग़ल के बाल उखाड़ना।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि पाँच काम दीन-ए-इस्लाम और रसूलों की सुन्नतों का हिस्सा हैं : 1- ख़तना करना। यानी लिंग की सुपारी के ऊपर की अतिरिक्त चमड़ी को काट देना। इसी तरह स्त्री की योनी में लिंग प्रवेश के स्थान के ऊपर की चमड़ी के सिर को काट देना। 2- अगली शर्मगाह के आस-पास के बालों को मूँडना। 3- मूँछ छोटी करना। यानी पुरुष के ऊपरी होंठ पर उगे हुए बालों को इस तरह काटना कि होंठ ज़ाहिर हो जाए। 4- नाख़ूनों को काटना। 5- बगल के बाल उखाड़ना।

फ़ायदे
  1. नबियों की वह सुन्नतें, जो अल्लाह को प्रिय एवं पसंद हैं और जिनका वह आदेश देता है और जो कमाल, सफ़ाई और सुंदरता का कारण हैं।
  2. इन बातों का ध्यान रखना चाहिए और इनसे बेपरवाह नहीं होना चाहिए।
  3. इन कार्यों के कुछ लौकिक एवं धार्मिक फ़ायदे हैं। मसलन देखने में अच्छा लगना, बदन की सफ़ाई, पाकी में एहतियात, अविश्वासियों की मुख़ालफ़त और अल्लाह के आदेश का पालन।
  4. अन्य हदीसों में इन पाँच कार्यों के अलावा भी कुछ कार्यों को मानव प्रकृति के कार्य बताया गया है। जैसे दाढ़ी बढ़ाना और मिस्वाक करना आदि।
हवाला

صحيح البخاري (7/ 160) (5891). صحيح مسلم (1/ 222) (257). عمدة الأحكام (ص44) (30). الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (1/ 45). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام (ص58). تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، لابن عثيمين (1/ 72).

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मूँछें कतरवाओ और दाढ़ी बढ़ाओ।

عن ابن عمر رضي الله عنهما عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «أحْفُوا الشَّوَارِبَ وأَعْفُوا اللِّحَى».
अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मूँछें कतरवाओ और दाढ़ी बढ़ाओ।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आदेश दे रहे हैं कि मूँछों को न छोड़ दिया जाए, बल्कि उनको काटा जाए और अच्छी तरह काटा जाए। जबकि इसके मुक़ाबले में दाढ़ी को बढ़ाने और भरपूर अंदाज़ में छोड़ देने का आदेश दे रहे हैं।

फ़ायदे
  1. दाढ़ी मूँड़ना हराम है।
हवाला

صحيح البخاري (7/ 160) (5892). صحيح مسلم (1/ 222) (259). رياض الصالحين (ص338) (1205). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (2/ 345). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمصطفى الخِن (2/ 853). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (5/ 228). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (14/ 507). تطريز رياض الصالحين، لفيصل آل مبارك (ص676). منار القاري شرح مختصر صحيح البخاري، لحمزة محمد قاسم (5/ 236).

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मैं नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास उस समय पहुँचा, जब आप एक ताज़ा मिसवाक से दाँत साफ़ कर रहे थे। वह कहते हैंः मिसवाक का एक किनारा आपकी ज़ुबान पर था और आप उसे मुँह में लेकर ओ, ओ कर रहे थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे आप उलटी कर रहे हों।

عن أبي موسى الأشعري رضي الله عنه قال: ((أتَيتُ النبي صلى الله عليه وسلم وهو يَسْتَاكُ بِسِوَاك رَطْب، قال: وطَرَفُ السِّوَاك على لسانه، وهو يقول: أُعْ، أُعْ، والسِّوَاك في فِيه، كأنَّه يَتَهَوَّع)).
अबू मूसा अशअरी (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि मैं नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास उस समय पहुँचा, जब आप एक ताज़ा मिसवाक से दाँत साफ़ कर रहे थे। वह कहते हैंः मिसवाक का एक किनारा आपकी ज़ुबान पर था और आप उसे मुँह में लेकर ओ, ओ कर रहे थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे आप उलटी कर रहे हों।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अबू मूसा अशअरी कहते हैं कि वह नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए, तो देखा कि आप ताज़ा मिसवाक से दाँत साफ़ कर रहे हैं, क्योंकि इससे सफ़ाई अधिक होती है। वह मुँह के भीतर टूटती भी नहीं है कि किसी प्रकार का कष्ट हो। आप मिसवाक को जीभ पर रखकर इस तरह मिसवाक करने में अत्युक्ति कर रहे थे कि लग रहा था कि जैसे उल्टी कर रहे हों।

हवाला

الإلمام بشرح عمدة الأحكام، إسماعيل بن محمد الأنصاري، دار الفكر، دمشق، الطبعة: الأولى، 1381هـ. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، تحقيق: محمد صبحي حلاق، مكتبة الصحابة، الأمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة: العاشرة، 1426هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، محمد بن صالح العثيمين، مكتبة الصحابة، الإمارات، الطبعة: الأولى، 1426هـ. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام -صلى الله عليه وسلم-، لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، الطبعة: الثانية، 1408هـ. صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ.

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मैंने तुम्हें मिसवाक के प्रति बहुत ज़्यादा कहा है।

عن أنس رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «أكْثَرْتُ عليكم في السِّوَاك».
अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "मैंने तुम्हें मिसवाक के प्रति बहुत ज़्यादा कहा है।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428ه . - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. - صحيح البخاري –الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ.

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मिसवाक (दातून) मुँह को साफ़ करने वाली और अल्लाह को प्रसन्न करने वाली वस्तु है।

عن عائشة رضي الله عنها قالت: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «السِّوَاكُ مَطْهَرَةٌ لِلْفَمِ، مَرْضَاةٌ لِلرَّبِّ».
आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, वह कहती हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मिसवाक (दातून) मुँह को साफ़ करने वाली और अल्लाह को प्रसन्न करने वाली वस्तु है।"
इसे नसई और अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि पीलू के पेड़ आदि की शाखा से दाँतों को साफ़ करना, मुँह को गंदगियों तथा दुर्गंध से बचाता है और इससे बंदे को अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त होती है। क्योंकि यह एक तो अल्लाह के आदेश का अनुपालन है और दूसरा इससे स्वच्छता प्राप्त होती है जो अल्लाह को पसंद है।

फ़ायदे
  1. मिस्वाक करने की फ़ज़ीलत तथा अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम द्वारा उम्मत को अधिक से अधिक मिस्वाक करने की प्रेरणा।
  2. बेहतर यह है कि मिस्वाक पीलू पेड़ की शाखा से किया जाए। उसके स्थान पर ब्रश तथा टूथ पेस्ट का इस्तेमाल भी पर्याप्त है।
हवाला

سنن النسائي (1/ 10) (5). مسند أحمد (40/ 240) (24203). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (2/ 342). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمصطفى الخِن وغيره (2/ 852). تطريز رياض الصالحين، لفيصل آل مبارك (ص675).

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मैंने आइशा रज़ियल्लाहु अनहा से पूछा कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब घर आते, तो सबसे पहले कौन-सा काम करते थे? उन्होंने उत्तर दिया : आप सबसे पहले मिसवाक किया करते थे।

عَنِ شُرَيْحٍ بنِ هانِئٍ قَالَ: سَأَلْتُ عَائِشَةَ، قُلْتُ: بِأَيِّ شَيْءٍ كَانَ يَبْدَأُ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا دَخَلَ بَيْتَهُ؟ قَالَتْ: بِالسِّوَاكِ.
शुरैह बिन हानी से रिवायत है, वह कहते हैं : मैंने आइशा रज़ियल्लाहु अनहा से पूछा कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब घर आते, तो सबसे पहले कौन-सा काम करते थे? उन्होंने उत्तर दिया : आप सबसे पहले मिसवाक किया करते थे।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- का मामूल था कि घर में प्रवेश करने के बाद सबसे पहले मिस्वाक करते। समय चाहे जो भी हो। रात हो कि दिन।

फ़ायदे
  1. वैसे तो मिस्वाक करना सभी समयों में वांछित है, लेकिन कुछ समयों में उसकी ताकीद है, जिनमें शरीयत ने मिस्वाक करने की ताकीद की है। जैसे घर में प्रवेश करते समय, नमाज़ के समय, वज़ू के समय, नींद से जागते समय और मुँह का गंध बदल जाने पर।
  2. ताबेईन अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के हालात और सुन्नतों को जानने की बड़ी जिज्ञासा रखते थे, ताकि आपका अनुसरण कर सकें।
  3. ज्ञान तथा अपने से अधिक जानकारी रखने वालों से ज्ञान अर्जित करने की प्रेरणा। यहाँ आइशा रज़ियल्लाहु अनहा से पूछा गया है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- घर में प्रवेश करते समय किस अवस्था में होते थे?
  4. घर वालों के साथ जीवन बिताने का अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- का सुंदर तरीक़ा कि घर में प्रवेश करते समय मुँह साफ़ कर लिया करते थे।
हवाला

صحيح مسلم (1/ 220) (253). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (2/ 341). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (2/ 851). المنهاج شرح صحيح مسلم بن الحجاج، النووي (3/ 144).

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दस कार्य प्राकृतिक हैं; मूँछ काटना, दाढ़ी बढ़ाना, मिसवाक करना, नाक में पानी चढ़ाना, नाखून काटना, जोड़ों को धोना, बगल के बाल उखेड़ना, पेड़ू के बाल साफ़ करना और पानी से पेशाब एवं शोच करने के बाद सफाई करना

عن عائشة رضي الله عنها مرفوعاً: «عَشْرٌ من الفِطْرة: قَصُّ الشَارب، وإعْفَاء اللِّحْية، والسِّواك، وَاسْتِنْشَاقُ الماء، وقص الأظْفَار، وغَسْل البَرَاجِم، ونَتْف الإبْط، وحلق العَانة، وانْتِقَاصُ الماء» قال الراوي: ونَسِيْتُ العاشرة إلا أن تكون المَضْمَضَة. قال وكِيع - وهو أحد رواته - انْتِقَاص الماء: يعني الاسْتِنْجَاء.
आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "दस कार्य प्राकृतिक हैं; मूँछ काटना, दाढ़ी बढ़ाना, मिसवाक करना, नाक में पानी चढ़ाना, नाखून काटना, जोड़ों को धोना, बगल के बाल उखेड़ना, पेड़ू के बाल साफ़ करना और पानी से इस्तिंजा अर्थात पेशाब एवं शोच करने के बाद सफाई, करना।" वर्णनकर्ता कहते हैं कि मैं दसवाँ कार्य भूल गया, परन्तु यह कि वह कु्ल्ली करना हो सकता है। इस हदीस के एक वर्णनकर्ता वकी ने 'انْتِقَاص الماء' का अर्थ इस्तिंजा बताया है।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

इस हदीस में आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- ने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के हवाले से मानव प्रकृति से जुड़ी हुई कुछ बातें बयान की हैं। दरअसल "प्रकृति" से मुराद इनसान की वह संरचना है, जो अल्लाह की बनाई हुई है और जो शुभ एवं मंगल हुआ करती है। याद रहे कि यहाँ मुराद बिगड़ी हुई प्रकृति नहीं, बल्कि स्वच्छ प्रकृति है। क्योंकि बिगड़ी हुई प्रकृति का कोई एतबार नहीं है। अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- का फ़रमान है : "हर जन्म लेने वाला बच्चा मूल प्रकृति पर जन्म लेता है। फिर उसके माता-पिता उसे यहूदी, ईसाई या मजूसी बना देते हैं।" इनमें से पहली चीज़ है "मूँछ काटना" कि होंठ दिखता हो। इसमें स्वच्छता भी है और नाक से निकलने वाली चीज़ों से बचाव भी। क्योंकि मूँछ के बाल जब होंठ पर लटकने लगते हैं, तो उससे खाने-पीने की चीज़ें लग जाती हैं। इसी तरह मूँछ बढ़ाना दरअसल अल्लाह की संरचना को बिगाड़ना भी है। यह सही है कि कुछ लोग इसे अच्छा भी समझते हैं, लेकिन इस प्रकार के लोग किसी गिनती में नहीं आते। अतः मुसलमान को अपनी मूँछ को काटते अथवा मूँड़ते रहना चाहिए और चालीस दिन से अधिक समय तक रहने नहीं देना चाहिए। क्योंकि अनस -रज़ियल्लाहु अनहु- से वर्णित सहीह मुस्लिम की एक रिवायत में है : "हमारे लिए मूँछ तथा नाखून काटने, बगल के बाल उखाड़ने और पेड़ू के बाल साफ़ करने का समय निर्धारित कर दिया गया है कि हम चालीस दिन से अधिक न छोड़ें।" "दाढ़ी बढ़ाना" दाढ़ी उन बालों को कहते हैं, जो ठुड्डी एवं दोनों दाढ़ों पर उगते हैं। यहाँ बढ़ाने से आशय यह है कि उन्हें पूरा का पूरा छोड़ दिया जाए। न मूँड़ा जाए और न काटा जाए। न कम न ज़्यादा। क्योंकि इस आशय को बताने के लिए प्रयुक्त अरबी शब्द "الإعفاء" अधिक करने तथा पूरा देने के मायने में आता है। अतः आपके शब्दों का अर्थ है, दाढ़ी को अधिक करो और पूरा रहने दो। जैसा कि अल्लाह तआला का फ़रमान है : "حتى عَفَوا" यानी जब वे सुखी हो गए। अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की बुहत-सी हदीसों में विभिन्न शब्दों द्वारा दाढ़ी बढ़ाने का आदेश आया है। कहीं "وفروا" का शब्द आया है, तो कहीं "أرخوا" का और कहीं "أعفوا" का। ये सारे शब्द दाढ़ी को बाक़ी रखने, बढ़ने देने और उससे छेड़छाड़ न करने को प्रमाणित करते हैं। अतः किसी मुसलमान के लिए दाढ़ी मूँड़ना किसी भी अवस्था में वैध नहीं है। अगर किसी ने यह कृत्य किया, तो उसने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के तरीक़े की मुख़ालफ़त की, आपके आदेश की अवहेलना की और मुश्रिकों जैसा काम किया। "मिसवाक करना" यानी मिसवाक करना उन मानव प्रकृति का पता देने वाले कार्यों में से एक है, जिनकी प्रेरणा शरीयत ने दी है। क्योंकि मिसवाक मुँह स्वच्छ रखने वाली और अल्लाह को प्रसन्न रखने वाली चीज़ है। यही कारण है कि मिसवाक किसी भी समय की जा सकती है। लेकिन विशेष रूप से वज़ू के समय, नमाज़ से पहले, नींद से जागने के बाद, मुँह का स्वाद ख़राब होने पर और दाँतों के पीले हो जाने आदि पर उसपर अधिक ज़ोर दिया गया है। "नाक में पानी चढ़ाना" यानी नाक में पानी चढ़ाना भी मानव प्रकृति से निकले हुए कार्यों में से एक है। क्योंकि यह स्वच्छता प्राप्त करने और नाक के अंदर की उन गंदगियों को हटाने का साधन है, जो हानिकारक सिद्ध हो सकती हैं। नाक में पानी चढ़ाने का काम वज़ू के अंदर भी हो सकता है और उसके बाहर भी। जब भी नाक साफ़ करने की आवश्यकता महसूस हो, उसमें पानी चढ़ाइए और उसकी सफ़ाई कीजिए। इसकी ज़रूरत अलग-अलग लोगों को अलग-अलग हुआ करती है। कुछ लोगों को इसकी ज़रूरत केवल वज़ू के समय पड़ती है और कुछ लोगों को उसके अतिरिक्त भी बहुत बार पड़ती है। मानव प्रकृति से निकले हुए कार्यों में से एक कार्य कुल्ली करना भी है। क्योंकि मुँह एवं नाक में बहुत-से मैलकुचैल एकत्र होते रहते हैं। अतः उनकी सफ़ाई पर ध्यान देना भी मानव प्रकृति को मूर्त रूप देने वाले कार्यों में से एक है। "नाख़ून काटना" यानी नाखून काटना भी मानव प्रकृति को सामने लाने वाले कार्यों में से है। यहाँ मुराद हाथ एवं पाँव की उंगलियों के नाखून हैं। अतः उन्हें चालीस दिन से अधिक नहीं रहने देना चाहिए। चालीस दिन का प्रमाण वह हदीस है, जो इससे पहले गुज़र चुकी है। "जोड़ों को धोना" यानी उंगलियों के जोड़ों के अंदरूनी एवं बाहरी भागों को धोना। क्योंकि इन स्थानों के सिकुड़न एवं संकुचन के कारण उनके अंदर मैल जमा हो जाता है, जिसकी वजह से त्वचा तक पानी पहुँच नहीं पाता। लेकिन जब उनका ख़याल रखते हुए उन्हें रगड़ दिया जाए और उनपर दूसरी बार हाथ फेर दिया जाए, तो पानी पहुँच जाता है। अतः मानव प्रकृति का तक़ाज़ा है कि इनसान इन्हें धोने पर विशेष ध्यान दे। उंगलियों के जोड़ों के ही हुक्म में शरीर का हर वह अंग होगा, जिसमें मैल जमा हो जाता हो, जैसे कानों के छिद्र और रानों के भीतरी भाग, जो आम तौर पर छिपे रहते हैं। "बगल के बाल उखाड़ना" इन बालों को जड़ से उखाड़ फेंकने की बात इसलिए कही गई है कि ये बाल ऐसे स्थान में होते हैं, जहाँ अत्यधिक मात्रा में पसीना आता है, मैल जमा हो जाता है तथा बदबू पैदा हो जाती है। इन बालों को चालीसे दिन से अधिक रहने नहीं देना चाहिए। इसका प्रमाण अनस -रज़ियल्लाहु अनहु- की वह हदीस है, जो पीछे गुज़र चुकी है। अगर हो सके तो इन बालों को उखाड़ देना ही उत्तम है। लेकिन यदि उखाड़ना कठिन हो, तो मूंडने अथवा अनावश्यक बाल हटाने वाले क्रीम आदि का प्रयोग करने में कोई हर्ज नहीं है। क्योंकि असल उद्देश्य उन्हें हटाना और उस स्थान को साफ़ करना है और इससे भी उद्देश्य पूरा हो जाता है। "पेड़ू के बाल साफ़ करना" यानी पेड़ू के बाल साफ़ करना भी मानव प्रकृति को उजागर करने वाले कार्यों में से एक है। ज्ञात हो कि पेड़ू के बाल से मुराद वह खुरदरे बाल हैं, जो पुरुष तथा स्त्री की अगली शर्मगाह के आसपास उगते हैं। इन बालों को साफ़ करते रहना चाहिए। इसके लिए इन्हें मूड़ा भी जा सकता है, उखाड़ा भी जा सकता है, काटा भी जा सकता है और आधुनिक आविष्कारों का प्रयोग भी किया जा सकता है। क्योंकि उद्देश्य सफ़ाई करना है और इन सारे तरीक़ों से उद्देश्य पूरा हो जाता है। इन बालों को भी अनस -रज़ियल्लाहु अनहु- की उक्त हदीस में आए निर्देश के कारण चालीस दिनों से अधिक छोड़ा नहीं जा सकता। फ़ितरत के कार्यों में से एक कार्य है "انْتِقَاصُ الماء"। इसका अर्थ इस्तिंजा बताया गया है, जिसकी पुष्टि अबू दाऊद एवं इब्न-ए-माजा में अम्मार बिन यासिर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- से वर्णित उस हदीस से होती है, जिसमें है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "फ़ितरत के कार्य हैं, कुल्ली करना, नाक में पानी चढ़ाना... और इस्तिंजा करना।" याद रहे कि इस्तिंजा नाम है पेशाब अथवा पाखाना के रास्तों में से किसी रास्ते से निकलने वाली किसी चीज़ को पानी, पत्थर, कपड़ा एवं रूमाल आदि ऐसी चीज़ों से साफ़ करने का, जिनके अंदर साफ़ करने का गुण पाया जाता हो। वर्णनकर्ता कहते हैं कि मैं दसवीं वस्तु भूल गया। हो सकता है कि वह कुल्ली करना हो। यह दरअसल एक वर्णनकर्ता का संदेह है, जो यहाँ बयान किया गया है।

हवाला

- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428ه. - دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين؛ لمحمد بن علان الشافعي، دار الكتاب العربي-بيروت - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. - صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - تطريز رياض الصالحين؛ تأليف فيصل آل مبارك، تحقيق د. عبد العزيز آل حمد، دار العاصمة-الرياض، الطبعة الأولى، 1423هـ. - كنوز رياض الصالحين، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا- الطبعة الأولى1430ه - شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ. - بهجة قلوب الأبرار وقرة عيون الأخيار في شرح جوامع الأخبار :عبد الرحمن بن سعدي - المحقق: عبد الكريم بن رسمي ال الدريني دار النشر: مكتبة الرشد للنشر والتوزيع الطبعة: الأولى 1422هـ - 2002م - فتاوى اللجنة الدائمة للبحوث العلمية والإفتاء - المجموعة الأولى - رئاسة إدارة البحوث العلمية والإفتاء - الإدارة العامة للطبع - الرياض.

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  1. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब रात में सोकर उठते, तो अपने मुँह को मिसवाक से रगड़कर साफ़ करते।
  2. पाँच चीज़ें (मानव) प्रकृति (का हिस्सा) हैं ; ख़त्ना करना, नाभी के नीचे के बाल मूँडना, मूँछें छोटी करना, नाख़ून काटना और बग़ल के बाल उखाड़ना।
  3. मूँछें कतरवाओ और दाढ़ी बढ़ाओ।
  4. मैं नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास उस समय पहुँचा, जब आप एक ताज़ा मिसवाक से दाँत साफ़ कर रहे थे। वह कहते हैंः मिसवाक का एक किनारा आपकी ज़ुबान पर था और आप उसे मुँह में लेकर ओ, ओ कर रहे थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे आप उलटी कर रहे हों।
  5. मैंने तुम्हें मिसवाक के प्रति बहुत ज़्यादा कहा है।
  6. मिसवाक (दातून) मुँह को साफ़ करने वाली और अल्लाह को प्रसन्न करने वाली वस्तु है।
  7. मैंने आइशा रज़ियल्लाहु अनहा से पूछा कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब घर आते, तो सबसे पहले कौन-सा काम करते थे? उन्होंने उत्तर दिया : आप सबसे पहले मिसवाक किया करते थे।
  8. दस कार्य प्राकृतिक हैं; मूँछ काटना, दाढ़ी बढ़ाना, मिसवाक करना, नाक में पानी चढ़ाना, नाखून काटना, जोड़ों को धोना, बगल के बाल उखेड़ना, पेड़ू के बाल साफ़ करना और पानी से पेशाब एवं शोच करने के बाद सफाई करना
  9. हमारे लिए मूंछ काटने, नाखून काटने, बगल के बाल उखाड़ने, और जघन बाल काटने की अवधि निर्धारित की गई है कि इन्हें हम चालीस रातों से अधिक न छोड़ें।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com