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तशरीह के साथ हदीसें

शरई राजनीति

53 हदीसें

ऐ अब्दुर्रहमान बिन समुरा! सत्ता न माँगो, क्योंकि यदि माँगने पर सत्ता दिए गए, तो तुम उसी के हवाले कर दिए जाओगे

عن عَبْد الرَّحْمَنِ بْن سَمُرَةَ رضي الله عنه أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال له: «يا عبد الرحمن بن سَمُرَة، لا تَسْأَلِ الإِمَارَةَ؛ فإنك إن أُعْطِيتَها عن مَسْأَلَةٍ وُكِلْتَ إليها، وإن أُعْطِيتَهَا عن غير مَسْأَلَةٍ أُعِنْتَ عليها، وإذا حَلَفْتَ على يمينٍ فرأيتَ غيرها خيرًا منها، فَكَفِّرْ عن يمينك، وَأْتِ الذي هو خير».
अब्दुर्रहमान बिन समुरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः ऐ अब्दुल रहमान बिन समुरा! सत्ता न माँगो, क्योंकि यदि माँगने पर सत्ता दिए गए, तो तुम उसी के हवाले कर दिए जाओगे, तथा यदि बिना माँगे सत्ता दिए गए, तो उसके निर्वाहण में तुम्हारी सहायता की जाएगी। तथा जब तुम किसी बात की क़सम खाओ और अन्य बात को उससे उत्तम देखो, तो क़सम का कफ़्फ़ारा दो और वह करो, जो उत्तम हो।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कोई प्रशासनिक पद माँगकर लेने से मना फ़रमाया है, इसलिए कि यदि किसी को माँगने के कारण पद मिलता है, तो उसकी सहायता नहीं की जाती और उसे असहाय छोड़ दिया जाता है, क्योंकि वह दुनिया चाहता है और उसे आखिरत पर तरजीह देता है। जबकि जो बिना माँगे पद प्राप्त करता है, अल्लाह उसे संभालने के संबंध में उसकी सहायता करता है। इस हदीस में यह भी बताया गया है कि क़सम किसी अच्छे कार्य से रोक नहीं सकती। यदि क़सम खाने वालेे को लगे कि भलाई क़सम को तोड़नेे ही में है, तो उसके लिए जायज़ है कि कफ़्फ़ारा देकर क़सम से छुटकारा प्राप्त कर ले और वह कार्य करे, जो अच्छा है।

हवाला

1- صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. 2- صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ. 3- الإلمام بشرح عمدة الأحكام، إسماعيل بن محمد الأنصاري، دار الفكر، دمشق، الطبعة: الأولى 1381 هـ. 4- تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، تحقيق: محمد صبحي حلاق، مكتبة الصحابة، الأمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة: العاشرة 1426 هـ. 5- تأسيس الأحكام، أحمد بن يحيى النجمي، دار المنهاج، القاهرة، الطبعة: الأولى 1427هـ.

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हमने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से कठिनाई और आसानी में, चुस्ती और सुस्ती में और हमारे ऊपर तरजीह दिए जाने की अवस्था में भी सुनेंगे और अनुसरण करेंगे

عن عُبَادَةَ بن الصَّامتِ رضي الله عنه قال: بَايَعْنَا رسولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم على السَّمْعِ وَالطَّاعَةِ فِي الْعُسْرِ وَالْيُسْرِ، وَالْمَنْشَطِ وَالْمَكْرَهِ، وعلى أَثَرَةٍ علينا، وعلى أَلَّا نُنَازِعَ الْأَمْرَ أهلَه، وعلى أَنْ نَقُولَ بِالْحَقِّ أينما كُنَّا، لا نَخَافُ في الله لَوْمَةَ لَائِمٍ.
उबादा बिन सामित रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं : हमने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से कठिनाई और आसानी में, चुस्ती और सुस्ती में और हमारे ऊपर तरजीह दिए जाने की अवस्था में भी सुनेंगे और अनुसरण करेंगे। और इस बात पर बैअत की कि हम शासकों से शासन के मामले में नहीं झगड़ेंगे और जहाँ कहीं भी होंगे, हक़ बात कहेंगे और इस विषय में किसी निंदा करने वाले की निंदा की परवाह नहीं करेंगे।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

इस हदीस में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने साथियों से इस बात की प्रतिज्ञा ली कि वे आसान तथा कठिन हालत और धनवान् तथा निर्धन होने की अवस्था में, शासकों के आदेश उनको पसंद हों या न हों, यहाँ तक कि शासक सार्वजनिक धन एवं पदों आदि के मामले में उनपर किसी और को तरजीह ही क्यों न देते हों, उनकी बात मानकर चलेंगे और उनके विरुद्ध बग़ावत नहीं करेंगे। क्योंकि उनसे लड़ने के नेतीजे में जो फ़ितना व फ़साद मचेगा, वह उनके अत्याचार के नतीजे में होने वाले फ़ितना व फ़साद से अधिक बड़ा है। आपने उनसे इस बात की भी प्रतिज्ञा ली कि जहाँ भी रहेंगे अल्लाह के लिए सत्य ही कहेंगे और किसी की निंदा की परवाह नहीं करेंगे।

फ़ायदे
  1. शासकों की सुनने और उनका अनुसरण का परिणाम यह होगा कि मुसलमान एकजुट रहेंगे और उनके बीच फूट नहीं पड़ेगी।
  2. शासकों की बातों को, जब तक वे अल्लाह की नाफ़रमानी का आदेश न दें, सुनना और मानना ज़रूरी है। आसान परिस्थिति में भी और कठिन परिस्थिति में भी। पसंद हो तब भी और नापसंद हो तब भी तथा किसी और को तरजीह दी जाए, तब भी।
  3. हम जहाँ भी रहें, किसी की निंदा की परवाह किए बिना सत्य कहना वाजिब है।
हवाला

صحيح البخاري (9/ 47) (7055-7056)، (9/ 77) (7199، 7200). صحيح مسلم (3/ 1470) (1709). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 277). رياض الصالحين، للنووي (ص83) (186). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (2/ 419). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 202).

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जिस बंदे को अल्लाह जनता की रखवाली का काम सोंपे और वह जिस दिन मरे तो उन्हें धोखा देते हुए मर जाए, तो उसपर अल्लाह जन्नत हराम कर देता है।

عن مَعقِلِ بن يَسار المُزَنِيّ رضي الله عنه قال: إني سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «مَا مِنْ عَبْدٍ يَسْتَرْعِيهِ اللهُ رَعِيَّةً، يَمُوتُ يَوْمَ يَمُوتُ وَهُوَ غَاشٌّ لِرَعِيَّتِهِ، إِلَّا حَرَّمَ اللهُ عَلَيْهِ الْجَنَّةَ».
माक़िल बिन यसार मुज़नी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, उन्होंने कहा : मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "जिस बंदे को अल्लाह जनता की रखवाली का काम सोंपे और वह जिस दिन मरे तो उन्हें धोखा देते हुए मर जाए, तो उसपर अल्लाह जन्नत हराम कर देता है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि हर व्यक्ति को अल्लाह ने लोगों का संरक्षक बनाया है। संरक्षण चाहे आम हो, जैसे शासक का संरक्षण या खास, जैसे घर में एक पुरुष का संरक्षण या घर में एक स्त्री का संरक्षण। ऐसे में जिसने अपने अधीन लोगों के हक़ में कोताही की, धोखा किया और उनके सांसारिक एवं धार्मिक अधिकारों को नष्ट कर दिया, वह इस सख़्त दंड का हक़दार बन गया।

फ़ायदे
  1. यह चेतावनी इस्लामी राज्य के सबसे बड़े शासक और उसके प्रतिनिधियों के लिए खास नहीं है, बल्कि इसमें हर वह आदमी शामिल है, जिसके अधीन अल्लाह ने कुछ लोग रखे हों।
  2. मुसलमानों की कोई भी सार्वजनिक ज़िम्मेवारी संभालने वाले हर व्यक्ति पर दायित्व है कि वह उनके बारे में भला सोचे, अमानत अदा करने की कोशिस करे और विश्वासघात से सावधान रहे।
  3. सार्वजनिक या निजी, बड़ी या छोटी कोई भी ज़िम्मेवारी संभालने वाले के उत्तरदायित्व का महत्व।
हवाला

صحيح البخاري (9/ 64) (7150). صحيح مسلم (1/ 125) (142). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 706). فيض القدير شرح الجامع الصغير، للمناوي (5/ 488). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 543).

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सबसे अच्छे साथी चार हैं, सबसे अच्छा सैन्य-दल चार सौ का है और सबसे अच्छी सेना चार हज़ार की है और बारह हज़ार की सेना कम संख्या के कारण पराजित नहीं हो सकती।

عن ابن عباس رضي الله عنهما مرفوعاً: «خير الصحابة أربعة، وخير السَّرَايَا أَرْبَعُمِائة، وخير الجيوش أربعة آلاف، ولن يُغْلَبَ اثنا عشر ألفا مِنْ قِلَّةٍ»
अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः सबसे अच्छे साथी चार हैं, सबसे अच्छा सैन्य-दल चार सौ का है और सबसे अच्छी सेना चार हज़ार की है और बारह हज़ार की सेना कम संख्या के कारण पराजित नहीं हो सकती।
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين، للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير- دمشق، الطبعة الأولى، 1428ه. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي - الطبعة الأولى، 1418ه. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة - بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. - سنن أبي داود، لأبي داود السجستاني، تحقيق محمد محيي الدين عبد الحميد، المكتبة العصرية.

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जल्द ही तुम लोग इमारत और सरदारी की लालच करोगे। जबकि क़यामत के दिन तुम्हें उसकी वजह से नदामत और शर्मिंदगी होगी। दूध पिलाने वाली अच्छी होती है और दूध छुड़ाने वाली बुरी।

عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «إنكم سَتَحْرِصُونَ على الإِمَارَة، وستكون نَدَامَةً يوم القيامة، فَنِعْمَ المُرْضِعَةُ وَبِئْسَتِ الفَاطِمَةُ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है, वह नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से बयान करते हैं कि आपने फ़रमाया : “जल्द ही तुम लोग इमारत और सरदारी की लालच करोगे। जबकि क़यामत के दिन तुम्हें उसकी वजह से नदामत और शर्मिंदगी होगी। दूध पिलाने वाली अच्छी होती है और दूध छुड़ाने वाली बुरी।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

यह हदीस प्रशासनिक पदों तथा शरई दृष्टिकोण से उनके समान समझे जाने वाले अन्य पदों, जैसे न्यायिक ज़िम्मेवारियों के महत्व तथा आख़िरत में सामने आने वाली उनके प्रभावों से अवगत करती है। साथ ही उन्हें तलब करने और उनकी इच्छा रखने से सावधान करती है। ज्ञात हो कि यह चेतावनी उसके लिए है, जो इन पदों की योग्यता न रखने के बावजूद इन्हें प्राप्त करने की इच्छा रखता हो और अपने प्रयास से इन्हें प्राप्त करता हो। इसके विपरीत यदि कोई इनकी योग्यता रखता हो, इन्हें प्राप्त करने के लिए प्रयास न करता हो और इन्हें ग्रहण करने के बाद न्याय से काम लेता हो, तो इन्हें संभालने में अल्लाह की ओर से उसकी सहायता की जाएगी, जैसा कि अन्य हदीसों में उल्लिखित है। इस हदीस में प्रशासनिक पद के बारे में कहा गया है कि वह अच्छी दूध पिलाने वाली है, क्योंकि उससे धन, पद एवं आदेश लागू होने के रूप में कई लाभ होते हैं और बुरी दूध छुड़ाने वाली है, क्योंकि क़यामत के दिन उसके बड़े कड़वे नतीजे सामने आएँगे और उसके कारण इन्सान को शर्मिंदगियों का सामना करना पड़ेगा।

हवाला

- صحيح البخاري، تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق: محمد زهير الناصر، الناشر: دار طوق النجاة الطبعة: الأولى، 1422هـ - توضيح الأحكام مِن بلوغ المرام، تأليف: عبد الله بن عبد الرحمن بن صالح البسام، الناشر: مكتبة الأسدي، مكة المكرّمة الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م - تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، تأليف: صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان، الطبعة: الأولى، 1427 ه _ 2006 م - فتح ذي الجلال والإكرام شرح بلوغ المرام لمحمد بن صالح بن محمد العثيمين، تحقيق: صبحي بن محمد رمضان، وأُم إسراء بنت عرفة، ط1، المكتبة الإسلامية، مصر، 1427ه - منحة العلام في شرح بلوغ المرام، تأليف: عبد الله بن صالح الفوزان، الناشر: دار ابن الجوزي الطبعة : الأولى ، 1427 هـ- 1431 هـ - شرح سنن النسائي المسمى «ذخيرة العقبى في شرح المجتبى»، المؤلف: محمد بن علي بن آدم الإثيوبي الوَلَّوِي، الناشر: دار المعراج الدولية للنشر - دار آل بروم للنشر والتوزيع, الطبعة الأولى, 1416- 1424.

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यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com