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तशरीह के साथ हदीसें

इमामत-ए-कुबरा (शासनाध्यक्ष का पद संभालने) की शर्तें

4 हदीसें

ऐ अबूज़र, में तुमको कमज़ोर समझता हूँ, तथा तुम्हारे लिए भी वही बात पसंद करता हूँ, जो मैं अपने लिए पसंद करता हूँ; दो व्यक्तियों का भी अमीर न बनना और न किसी अनाथ के धन का वाली (संरक्षक) बनना।

عن أبي ذر رضي الله عنه قال: قال لي رسول الله صلى الله عليه وسلم «يَا أَبَا ذَرٍّ، إِنِّي أَرَاكَ ضَعِيفًا، وَإِنِّي أُحِبُّ لَكَ مَا أُحِبُّ لِنَفْسِي، لاَ تَأَمَّرَنَّ عَلَى اثْنَينِ، وَلاَ تَوَلَّيَنَّ مَالَ يَتِيمٍ».
अबूज़र (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मुझसे फरमायाः "ऐ अबूज़र, में तुमको कमज़ोर समझता हूँ, तथा तुम्हारे लिए भी वही बात पसंद करता हूँ, जो मैं अपने लिए पसंद करता हूँ; दो व्यक्तियों का भी अमीर न बनना और न किसी अनाथ के धन का वाली (संरक्षक) बनना।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428هـ. رياض الصالحين، ط4، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، 1428هـ. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، ط1، كنوز إشبيليا، الرياض، 1430هـ. شرح رياض الصالحين للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ.

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ऐ अबूज़र, तुम एक दुर्बल व्यक्ति हो और यह पद एक अमानत है और यह क़यामत के दिन अपमान तथा शर्मिंदगी का सामान भी है। यह और बात है कि कोई उसे उसके हक़ के साथ प्राप्त करे और उसके बारे में उसके ऊपर जो ज़िम्मेवारियाँ आती हैं, उन्हें अदा करे।

عن أبي ذر رضي الله عنه قال: قُلتُ: يَا رسُولَ الله، أَلاَ تَسْتَعْمِلُنِي؟ فَضَرَبَ بِيَدِهِ عَلَى مَنْكِبِي، ثُمَّ قَالَ: «يَا أَبَا ذَرٍّ، إِنَّكَ ضَعِيفٌ، وَإِنَّهَا أَمَانَةٌ، وَإِنَّهَا يَوْمَ القِيَامَةِ خِزيٌ وَنَدَامَةٌ، إِلاَّ مَنْ أَخَذَهَا بِحَقِّهَا، وَأَدَّى الَّذِي عَلَيهِ فِيهَا».
अबूज़र (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि मैंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, क्या आप मुझे कोई प्रशासनिक पद नहीं देंगे? तो आपने अपना हाथ मेरे कंधों पर मारकर फ़रमायाः "ऐ अबूज़र, तुम एक दुर्बल व्यक्ति हो और यह पद एक अमानत है और यह क़यामत के दिन अपमान तथा शर्मिंदगी का सामान भी है। यह और बात है कि कोई उसे उसके हक़ के साथ प्राप्त करे और उसके बारे में उसके ऊपर जो ज़िम्मेवारियाँ आती हैं, उन्हें अदा करे।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. رياض الصالحين، للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428 هـ. رياض الصالحين، ط4، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، 1428هـ. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، ط1، كنوز إشبيليا، الرياض، 1430هـ. شرح رياض الصالحين، للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت. المنهاج شرح صحيح مسلم بن الحجاج، للنووي، ط2، دار إحياء التراث العربي - بيروت، 1392ه. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ. تطريز رياض الصالحين، تأليف فيصل آل مبارك، تحقيق د. عبد العزيز آل حمد، دار العاصمة، الرياض، الطبعة الأولى، 1423هـ.

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ऐ अल्लाह! जो व्यक्ति मेरी उम्मत की कोई ज़िम्मेवारी हाथ में ले, फिर वह उन्हें कठिनाई में डाले, तो तू उसे कठिनाई में डाल। और जो मेरी उम्मत की कोई ज़िम्मेवारी हाथ में ले, फिर उनके साथ नर्मी का मामला करे, तो तू उसके साथ नर्मी का मामला कर।

عن عائشة رضي الله عنها قالت: سمعتُ من رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول في بيتي هذا: «اللَّهُمَّ مَنْ وَلِيَ مِنْ أَمْرِ أُمَّتِي شَيْئًا فَشَقَّ عَلَيْهِمْ فَاشْقُقْ عَلَيْهِ، وَمَنْ وَلِيَ مِنْ أَمْرِ أُمَّتِي شَيْئًا فَرَفَقَ بِهِمْ فَارْفُقْ بِهِ».
आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, उन्होंने कहा : मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को अपने इस घर में कहते हुए सुना है : "ऐ अल्लाह! जो व्यक्ति मेरी उम्मत की कोई ज़िम्मेवारी हाथ में ले, फिर वह उन्हें कठिनाई में डाले, तो तू उसे कठिनाई में डाल। और जो मेरी उम्मत की कोई ज़िम्मेवारी हाथ में ले, फिर उनके साथ नर्मी का मामला करे, तो तू उसके साथ नर्मी का मामला कर।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हर उस व्यक्ति के लिए बददुआ की है, जो मुसलमानों की कोई ज़िम्मेवारी हाथ में ले, वह ज़िम्मेवारी छोटी हो कि बड़ी, वह ज़िम्मेवारी आम हो या खास, फिर लोगों के साथ नर्मी भरा व्यवहार करने की बजाय उनको कठिनाई में डाले। इस प्रकार के व्यक्ति के हक़ में आपने बददुआ यह की है कि उसके कर्म की कोटि का प्रतिफल देते हुए अल्लाह उसे भी कठिनाई में डाले। जबकि ज़िम्मेवारी मिलने के बाद लोगों के साथ नर्मी भरा व्यवहार करने वाले और उनके साथ आसानी करने वाले के हक़ में यह दुआ की है कि अल्लाह उसके साथ नर्मी भरा व्यवहार करे और उसके काम आसान कर दे।

फ़ायदे
  1. मुसलमानों की कोई ज़िम्मेवारी हाथ में लेने वाले पर जहाँ तक हो सके मुसलमानों के साथ नर्मी भरा व्यवहार करना वाजिब है।
  2. अल्लाह बंदे को प्रतिफल उसी कोटि का देता है, जिस कोटि का उसका अमल होता है।
  3. नर्मी एवं सख़्ती की कसौटी क़ुरआन एवं हदीस है।
हवाला

صحيح مسلم (3/ 1458) (1828). فتح ذي الجلال والاكرام بشرح بلوغ المرام، لابن عثيمين (6/ 367). منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان (10/ 224). توضيح الأحكام من بلوغ المرام، للبسام (7/ 419).

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वह क़ौम कदापि सफल नहीं होगी, जिसने अपने मामले किसी औरत को सौंप दिए हों।

عَنْ أَبِي بَكْرَةَ رَضِيَ اللهُ عَنْهُ أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: «لَنْ يُفْلِحَ قَوْمٌ وَلَّوْا أَمْرَهُمُ امْرَأَةً».
अबू बकरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि उन्होंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "वह क़ौम कदापि सफल नहीं होगी, जिसने अपने मामले किसी औरत को सौंप दिए हों।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि वह क़ौम कभी सफलता नहीं पाएगी, जिसने न्याय, सामान्य शासन या मंत्रालय जैसे अपने मामले किसी औरत को सौंप दिए हों।

फ़ायदे
  1. महिलाएँ शासन, लोगों के बीच न्याय और इस तरह के अन्य सार्वजनिक पद नहीं संभालेंगी, अलबत्ता निजी मामलों, जैसे किसी वक़्फ़ या अनाथों की संरक्षकता, या किसी मदरसे का प्रबंधन और इस तरह के अन्य कार्य संभालने में कोई हर्ज नहीं हैै।
  2. स्त्री की शारीरिक कमी और स्वाभाविक निर्बलता के कारण वह सार्वजनिक पदों में पुरुष की भागीदार नहीं हो सकती और उसका ऐसे पदों को संभालना असफलता का कारण बनता है।
  3. अल्लाह ने महिला की रचना की और उसे पुरुष की प्रकृति से भिन्न प्रकृति प्रदान की, अतः कुछ कार्य ऐसे हैं, जिन्हें महिला का करना उचित नहीं है; उसकी विशेष प्रकृति के कारण, और इसी प्रकार कुछ कार्य ऐसे हैं, जिन्हें पुरुष का करना उचित नहीं है; उसकी विशेष प्रकृति के कारण।
  4. नकारात्मक सफलता : शरीयत की भाषा में फ़लाह यानी सफलता का अर्थ दुनिया और आख़िरत की भलाई प्राप्त करना है। यहाँ यह याद रहे कि किसी राज्य की समृद्धि इस बात की द्योतक नहीं है कि वहाँ रहने वाले लोगों को अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त होगी ही। जो समुदाय अल्लाह की आज्ञाकारी न हो, वह सफल नहीं है, चाहे देखने में सांसारिक रूप से बेहतर से बेहतर स्थिति ही में क्यों न हो।
  5. इस हदीस में महिला के दर्जे को कम नहीं किया गया है, बल्कि यह उसकी क्षमताओं का सही और उचित दिशा-निर्देशन है।
हवाला

صحيح البخاري (6/ 8) (4425). عمدة القاري شرح صحيح البخاري، لبدر الدين العيني (14/ 210). أعلام الحديث (شرح صحيح البخاري) لأبي سليمان الخطابي (3/ 1787). توضيح الأحكام مِن بلوغ المرام، لعبد الله البسام (7/ 183). فتح ذي الجلال والإكرام شرح بلوغ المرام، لابن عثيمين (2/ 268). منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان (3/ 441). ذخيرة العقبى في شرح المجتبى، للولوي (1/ 82). كشف المشكل من حديث الصحيحين، لابن الجوزي (2/ 16).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com