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तशरीह के साथ हदीसें

वह क़ौम कदापि सफल नहीं होगी, जिसने अपने मामले किसी औरत को सौंप दिए हों।

عَنْ أَبِي بَكْرَةَ رَضِيَ اللهُ عَنْهُ أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: «لَنْ يُفْلِحَ قَوْمٌ وَلَّوْا أَمْرَهُمُ امْرَأَةً».
अबू बकरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि उन्होंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "वह क़ौम कदापि सफल नहीं होगी, जिसने अपने मामले किसी औरत को सौंप दिए हों।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि वह क़ौम कभी सफलता नहीं पाएगी, जिसने न्याय, सामान्य शासन या मंत्रालय जैसे अपने मामले किसी औरत को सौंप दिए हों।

फ़ायदे
  1. महिलाएँ शासन, लोगों के बीच न्याय और इस तरह के अन्य सार्वजनिक पद नहीं संभालेंगी, अलबत्ता निजी मामलों, जैसे किसी वक़्फ़ या अनाथों की संरक्षकता, या किसी मदरसे का प्रबंधन और इस तरह के अन्य कार्य संभालने में कोई हर्ज नहीं हैै।
  2. स्त्री की शारीरिक कमी और स्वाभाविक निर्बलता के कारण वह सार्वजनिक पदों में पुरुष की भागीदार नहीं हो सकती और उसका ऐसे पदों को संभालना असफलता का कारण बनता है।
  3. अल्लाह ने महिला की रचना की और उसे पुरुष की प्रकृति से भिन्न प्रकृति प्रदान की, अतः कुछ कार्य ऐसे हैं, जिन्हें महिला का करना उचित नहीं है; उसकी विशेष प्रकृति के कारण, और इसी प्रकार कुछ कार्य ऐसे हैं, जिन्हें पुरुष का करना उचित नहीं है; उसकी विशेष प्रकृति के कारण।
  4. नकारात्मक सफलता : शरीयत की भाषा में फ़लाह यानी सफलता का अर्थ दुनिया और आख़िरत की भलाई प्राप्त करना है। यहाँ यह याद रहे कि किसी राज्य की समृद्धि इस बात की द्योतक नहीं है कि वहाँ रहने वाले लोगों को अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त होगी ही। जो समुदाय अल्लाह की आज्ञाकारी न हो, वह सफल नहीं है, चाहे देखने में सांसारिक रूप से बेहतर से बेहतर स्थिति ही में क्यों न हो।
  5. इस हदीस में महिला के दर्जे को कम नहीं किया गया है, बल्कि यह उसकी क्षमताओं का सही और उचित दिशा-निर्देशन है।
हवाला

صحيح البخاري (6/ 8) (4425). عمدة القاري شرح صحيح البخاري، لبدر الدين العيني (14/ 210). أعلام الحديث (شرح صحيح البخاري) لأبي سليمان الخطابي (3/ 1787). توضيح الأحكام مِن بلوغ المرام، لعبد الله البسام (7/ 183). فتح ذي الجلال والإكرام شرح بلوغ المرام، لابن عثيمين (2/ 268). منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان (3/ 441). ذخيرة العقبى في شرح المجتبى، للولوي (1/ 82). كشف المشكل من حديث الصحيحين، لابن الجوزي (2/ 16).

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इमामत-ए-कुबरा (शासनाध्यक्ष का पद संभालने) की शर्तें

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com