عن أبي بكرة رضي الله عنه قال: قال النبي صلى الله عليه وسلم: «أَلَا أُنَبِّئُكُمْ بِأَكْبَرِ الْكَبَائِرِ؟» ثَلَاثًا، قَالُوا: بَلَى يَا رَسُولَ اللهِ، قَالَ: «الْإِشْرَاكُ بِاللهِ، وَعُقُوقُ الْوَالِدَيْنِ» وَجَلَسَ وَكَانَ مُتَّكِئًا، فَقَالَ: «أَلَا وَقَوْلُ الزُّورِ»، قَالَ: فَمَا زَالَ يُكَرِّرُهَا حَتَّى قُلْنَا: لَيْتَهُ سَكَتَ.
अबू बकरा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, उन्होंने कहा : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रनाया : "क्या मैं तुम्हें सबसे बड़े गुनाहों के बारे में न बताऊँ?" आपने यह बात तीन बार दोहराई। हमने कहा : अवश्य, ऐ अल्लाह के रसूल! तो आपने फ़रमाया : "अल्लाह का साझी बनाना और माता-पिता की बात न मानना।" यह कहते समय आप टेक लगाए हुए थे, लेकिन सीधे बैठ गए और फ़रमाया : "सुन लो, झूठी बात कहना (भी बड़ा गुनाह है)।" यह बात आप इतनी बार दोहराते रहे कि हमने कहा कि काश आप खामोश हो जाते।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने साथियों के सामने सबसे बड़े गुनाहों का वर्णन करते हुए इन तीन गुनाहों का उल्लेख किया :
1- अल्लाह का साझी ठहराना : यानी कोई भी इबादत
अल्लाह के अतिरिक्त के लिए करना और अल्लाह के अतिरिक्त को अल्लाह की तरह पूज्य तथा रब बनाना और उसे अल्लाह के नाम तथा गुण दे देना।
2- माता-पिता की अवज्ञा करना : यानी माता-पिता को अपनी बात तथा कार्य द्वारा या उनके साथ अच्छा व्यवहार न करके किसी भी प्रकार का कष्ट देना।
3- झूठ बोलना, जिसका एक रूप झूठी गवाही देना है : यानी हर वह गढ़ी हुई और झूठी बात है, जिसका उद्देश्य किसी का माल हड़पना या किसी का अपमान करना आदि हो।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने झूठ बोलने से बार-बार सावधान यह बताने के लिए किया कि यह एक बुरी चीज़ है और समाज पर इसके बड़े बुरे प्रभाव पड़ते हैं। आपने झूठ बोलने से इतनी बार सावधान किया कि सहाबा ने आपकी परेशानी को देखकर कहा कि काश आप ख़ामोश हो जाते।
फ़ायदे
- सबसे बड़ा गुनाह अल्लाह का साझी ठहराना है, क्योंकि आपने इसका वर्णन सबसे पहले किया है, और इसकी पुष्टि इस आयत से भी होती है : "निःसंदेह, अल्लाह यह क्षमा नहीं करेगा कि उसका साझी बनाया जाए और इसके अतिरिक्त जिसके लिए जो चाहेगा क्षमा कर देगा।"
- माता-पिता के अधिकार का महत्व, क्योंकि अल्लाह ने उनके अधिकार को अपने अधिकार के साथ मिलाकर बयान किया है।
- गुनाहों के दो प्रकार हैं। कबीरा (बड़े) गुनाह और सग़ीरा (छोटे) गुनाह। कबीरा गुनाह हर वह गुनाह है, जिसकी कोई दुनियावी सज़ा निर्धारित हो, जैसे हुदूद एवं लानत आदि। या फिर जिसपर कोई आख़िरत की चेतावनी दी गई हो, जैसे जहन्नम में प्रवेश करने की चेतावनी। कबीरा गुनाह कई श्रेणियों के होते हैं, कुछ कबीरा गुनाह अन्य कुछ के मुक़ाबले में अधिक सख़्त हराम होते हैं। सग़ीरा गुनाह कबीरा गुनाहों को छोड़ अन्य गुनाहों को कहते हैं।
हवाला
صحيح البخاري (3/ 172) (2654)، (8/ 4) (5976)، (8/ 62) (6273-6274).
صحيح مسلم (1/ 91) (87).
عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم (ص257) (380).
شرح النووي على مسلم (2/ 81).
الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري (2/ 149).
تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام (ص703).
أعلام السنة المنشورة لاعتقاد الطائفة الناجية المنصورة، لحافظ بن أحمد الحكمي (ص111).
यह हदीस HadeethEnc.com परعَن الحَسَنِ قال: حَدَّثنا جُنْدَبُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ رضي الله عنه، فِي هَذَا المَسْجِدِ، وَمَا نَسِينَا مُنْذُ حَدَّثَنَا، وَمَا نَخْشَى أَنْ يَكُونَ جُنْدُبٌ كَذَبَ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلّى الله عليه وسلم: «كَانَ فِيمَنْ كَانَ قَبْلَكُمْ رَجُلٌ بِهِ جُرْحٌ، فَجَزِعَ، فَأَخَذَ سِكِّينًا فَحَزَّ بِهَا يَدَهُ، فَمَا رَقَأَ الدَّمُ حَتَّى مَاتَ، قَالَ اللَّهُ تَعَالَى: بَادَرَنِي عَبْدِي بِنَفْسِهِ، حَرَّمْتُ عَلَيْهِ الجَنَّةَ».
हसन से रिवायत है, वह कहते हैं : हमसे जुनदुब बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु ने इसी मस्जिद में बयान किया है और जब से उन्होंने बयान किया है, हम भूले नहीं हैं और हमें इस बात की भी आशंका नहीं है कि जुनदुब ने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के संबंध में झूठ बोला है। उनका कहना है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "तुमसे पहले एक व्यक्ति को ज़ख्म लगा, तो वह व्यथित हो गया और एक चाक़ू से अपना हाथ काट डाला। रक्त बंद न हुआ, यहाँ तक कि वह मर गया। अतः, अल्लाह तआला ने फ़रमाया : मेरे बंदे ने अपनी जान ख़त्म करने में जल्दबाज़ी से काम लिया, अतः मैंने उसपर जन्नत हराम कर दी।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया है कि पूर्ववर्ती जातियों में एक व्यक्ति के शरीर में एक ज़ख़्म लग गया, जो सब्र से काम न ले सका और अधीर होकर एक चाक़ू लिया और मरने के इरादे से उससे अपना हाथ काट डाला। कटे हुए स्थान से रक्त इतना बहने लगा कि अंततः वह मर गया। चुनांचे इस परिदृश्य में उच्च एवं महान अल्लाह ने कहा : मेरे बंदे ने अपनी जान ख़त्म करने में जल्दबाज़ी से काम लिया, अतः मैंने उसपर जन्नत हराम कर दी।
फ़ायदे
- विपत्ति के समय धैर्य रखने तथा अधीर न होने की फ़ज़ीलत, क्योंकि धैर्य खोने से इन्सान और बड़ी विपत्ति में पड़ सकता है।
- पिछली उम्मतों की अच्छी और उपदेशात्मक बातों का वर्णन करना।
- इब्न-ए-हजर कहते हैं : इस हदीस से मालूम होता है कि इन्सान को अल्लाह की निर्धारित सीमाओं का पालन करना चाहिए। साथ ही यह कि अल्लाह अपनी सृष्टि पर बड़ा दयावान है कि उसने आत्म हत्या को हराम क़रार दिया है। औ यह कि जीवन अल्लाह का दिया हुआ है और वही उसका मालिक है।
- आत्म हत्या की ओर ले जाने वाली चीज़ें हराम हैं। आत्म हत्या करने वाले को बड़ी सख़्त चेतावनी दी गई है।
- इब्न-ए-हजर कहते हैं : यह इस बात की दलील है कि उसने मरने के इरादे से उंगली काटी थी, इलाज की नीयत से नहीं कि जिससे लाभ होने की आशा रहती है।
हवाला
صحيح البخاري (4/ 170) (3463).
صحيح مسلم (1/ 107) (113).
فتح الباري، لابن حجر (3/ 227).
شرح النووي على مسلم (2/ 127).
تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، لعبد الله البسام (ص651).
यह हदीस HadeethEnc.com परعن عبد الله بن عمرو بن العاص رضي الله عنهما عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «الْكَبَائِرُ: الْإِشْرَاكُ بِاللهِ، وَعُقُوقُ الْوَالِدَيْنِ، وَقَتْلُ النَّفْسِ، وَالْيَمِينُ الْغَمُوسُ».
अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "बड़े गुनाह हैं, अल्लाह का साझी बनाना, माता-पिता की अवज्ञा करना, किसी की हत्या करना और झूठी क़सम खाना।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
इस हदीस में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बड़े गुनाह बयान कर रहे हैं। दरअसल बड़े गुनाह से मुराद वह गुनाह हैं, जिनमें लिप्त होने वाले को दुनिया या आख़िरत की कोई सख़्त चेतावनी दी गई हो।
चुनांचे सबसे पहला बड़ा गुनाह है अल्लाह का साझी ठहराना : यानी कोई भी इबादत अल्लाह के अतिरिक्त किसी और के लिए करना और अल्लाह के अतिरिक्त को अल्लाह की विशेषताओं में अलाह के बराबर कर देना, अर्थाथ रब होने, पूज्य होने और अल्लाह के नामों तथा गुणों में किसी को अल्लाह के बराबर ला खड़ा करना।
दूसरा बड़ा गुनाह है माता-पिता की अवज्ञा करना : यानी कोई ऐसा काम करना, बात कहना या उनके साथ अच्छा व्यवहार करना छोड़ देना, जिससे उनको कष्ट हो।
तीसरा बड़ा गुनाह है कि किसी की अवैध हत्या करना : जैसे अत्याचार करके किसी को मार डालना।
चौथा बड़ा गुनाह है झूठी क़सम खाना : यानी जान-बूझकर झूठी क़सम खाना। इसे अरबी में "यमीन-ए-ग़मूस" इसलिए कहा जाता है कि यह काम इन्सान को गुनाह या आग के समुद्र में डुबा देता है।
फ़ायदे
- झूठी क़सम इतना बड़ा गुनाह और भयावह अपराध है कि इसका कफ़्फ़ारा (प्रायश्चित) नहीं है। इसकी माफ़ी के लिए तौबा ज़रूरी है।
- इस हदीस में इन चार कबीरा गुनाहों का ज़िक्र इनकी संगीनी को सामने रखते हुए किया गया है। यह बताने के लिए नहीं कि कबीरा गुनाह बस चार ही हैं।
- गुनाहों के दो प्रकार हैं। कबीरा गुनाह और सग़ीरा गुनाह। कबीरा गुनाह हर वह गुनाह है, जिसकी कोई दुनियावी सज़ा निर्धारित हो। जैसे हुदूद एवं लानत आदि। या फिर जिसपर कोई आख़िरत की चेतावनी दी गई हो। जैसे जहन्नम में प्रवेश करने की चेतावनी। कबीरा गुनाह कई श्रेणियों के होते हैं। कुछ कबीरा गुनाह अन्य कुछ के मुक़ाबले में अधिक सख़्त हराम होते हैं। सग़ीरा गुनाह कबीरा गुनाहों को छोड़ अन्य गुनाहों को कहते हैं।
हवाला
صحيح البخاري (8/ 137) (6675).
بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 408).
رياض الصالحين للنووي (ص125) (337).
كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (5/ 610).
تطريز رياض الصالحين، لفيصل آل مبارك (ص964).
यह हदीस HadeethEnc.com परعَنْ أَبِي مُوسَى رضي الله عنه عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «إِنَّمَا مَثَلُ الْجَلِيسِ الصَّالِحِ وَالْجَلِيسِ السَّوْءِ كَحَامِلِ الْمِسْكِ وَنَافِخِ الْكِيرِ، فَحَامِلُ الْمِسْكِ: إِمَّا أَنْ يُحْذِيَكَ، وَإِمَّا أَنْ تَبْتَاعَ مِنْهُ، وَإِمَّا أَنْ تَجِدَ مِنْهُ رِيحًا طَيِّبَةً، وَنَافِخُ الْكِيرِ: إِمَّا أَنْ يُحْرِقَ ثِيَابَكَ، وَإِمَّا أَنْ تَجِدَ رِيحًا خَبِيثَةً».
अबू मूसा रज़ियल्लाहु अन्हु अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से रिवायत करते हैं कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अच्छे और बुरे साथी की मिसाल ऐसी है, जैसे कस्तूरी वाला और आग की भट्टी धौंकने वाला। कस्तूरी वाला या तो तुझे भेंट में खुशबू देगा, या तू उससे खरीद लेगा या तू उसकी सुगंध पाएगा। जबकि आग की भट्टी धौंकने वाला या तो तेरे कपड़े जला देगा या तू उसकी दुर्गंध पाएगा।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने दो प्रकार के लोगों की मिसाल देकर समझाया है :
पहला प्रकार : सदाचारी साथ बैठने वाला तथा मित्र, जो अल्लाह और उसकी प्रसन्नता की प्राप्ति के कामों की राह दिखाए और नेकी के कामों में सहोयग करे। उसकी मिसाल खुशबू बेचने वाले की तरह है। वह या तो तुमको भेंट के रूप में देगा या तुम उससे ख़रीदोगे या कम से कम जितनी देर उसके साथ रहोगे, उसकी खुशबू तुमको मिलती रहेगी।
दूसरा प्रकार : बुरा मित्र एवं साथ बैठने वाला, जो अल्लाह की राह से रोके, गुनाह के कामों में मदद करे, तुम उसके बुरे काम देखो और उसकी मित्रता एवं उसके साथ रहने से तुम्हार व्यक्तित्व पर आँच आए। ऐसे मित्र की मिसाल लोहार की तरह है, जो भट्टी फूँकता रहता हो। वह या तो उड़ती हुई चिंगारियों से तुम्हारे कपड़े जला देगा या फिर उसकी भट्टी के दर्गंध से तुम्हारी तबीयत बेचैन रहेगी।
फ़ायदे
- सुनने वाले को समझाने के लिए मिसाल देना जायज़ है।
- नेक और सदाचारी लोगों के साथ रहने तथा बिगड़े हुए और दुराचारियों से दूर रहने की प्रेरणा।
हवाला
صحيح البخاري (7/ 96) (5534).
صحيح مسلم (4/ 2026) (2628).
بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 431).
نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين (1/ 339).
شرح النووي على مسلم (16/ 178).
यह हदीस HadeethEnc.com परعن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «اجْتَنِبُوا السَّبْعَ الْمُوبِقَاتِ»، قَالُوا: يَا رَسُولَ اللهِ وَمَا هُنَّ؟ قَالَ: «الشِّرْكُ بِاللهِ، وَالسِّحْرُ، وَقَتْلُ النَّفْسِ الَّتِي حَرَّمَ اللهُ إِلَّا بِالْحَقِّ، وَأَكْلُ الرِّبَا، وَأَكْلُ مَالِ الْيَتِيمِ، وَالتَّوَلِّي يَوْمَ الزَّحْفِ، وَقَذْفُ الْمُحْصَنَاتِ الْمُؤْمِنَاتِ الْغَافِلَاتِ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "तुम लोग सात विनाशकारी वस्तुओं से बचो।" लोगों ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! वह क्या-क्या हैं? आपने फ़रमाया : "अल्लाह का साझी बनाना, जादू, अल्लाह के हराम किए हुए प्राणी को औचित्य ना होने के बावजूद क़त्ल करना, ब्याज खाना, यतीम का माल खाना, युद्ध के मैदान से पीठ दिखाकर भागना और निर्दोष भोली-भाली मोमिन स्त्रियों पर व्यभिचार का आरोप लगाना।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपनी उम्मत को सात विनाशकारी अपराधों एवं गुनाहों से बचने का आदेश दे रहे हैं। जब आपसे पूछा गया कि यह सात गुनाह क्या-क्या हैं, तो आपने उनको बयान करते हुए फ़रमाया :
1- अल्लाह का साझी ठहराना। यानी किसी भी प्रकार से किसी को अल्लाह का समान ठहराना और कोई भी इबादत अल्लाह के अतिरिक्त किसी और के लिए करना। आपने सबसे पहले शिर्क का ज़िक्र इसलिए किया कि शिर्क सबसे बड़ा गुनाह है।
2- जादू करना। जादू से मुराद है धागा आदि पर इस तरह गिरह लगाना, मंत्र पढ़ना और दवाओं तथा नशा लाने वाली चीज़ों का इस्तेमाल करना, जो जादू किए हुए व्यक्ति के शरीर को प्रभावित करते हुए उसे बीमार कर दे या उसकी जान ले ले या पति-पत्नी के बीच में जुदाई डाल दे। यह एक शैतानी कार्य है। अधिकतर समय जादू उसी समय काम करता है, जब शिर्क वाले काम किए जाएँ और दुष्ट रूहों को खुश करने के लिए उनके मन के अनुसार कुछ किया जाए।
3- किसी ऐसे व्यक्ति की हत्या कर देना, जिसकी जान लेने से अल्लाह ने मना किया हो। जाने लेने की अनुमति केवल उसी समय है, जब कोई शरई कारण पाया जाए और यह काम शासक के द्वारा किया जाए।
4- सूद लेना या देना। चाहे उसे खाया जाए या उससे किसी अन्य प्रकार का लाभ उठाया जाए।
5- किसी बच्चे के माल पर हाथ साफ़ करना, जो नाबालिग़ हो और उसका बाप मर गया हो।
6- काफ़िरों के साथ हो रहे युद्ध के मैदान से भाग खड़ा होना।
7- पाकदामन आज़ाद औरतों पर व्यभिचार का आरोप लगाना। इसी तरह पाकदामन आज़ाद मर्दों पर व्यभिचार का झूठा आरोप लगाना भी विनाशकारी गुनाह है।
फ़ायदे
- बड़े गुनाह केवल सात ही नहीं हैं। लेकिन विशेष रूप से इनका उल्लेख इसलिए किया गया है कि यह सात गुनाह कुछ ज़्यादा ही ख़तरनाक हैं।
- अगर कोई शरई कारण, जैसे क़िसास, इस्लाम का परित्याग और शादीशुदा होने के बावजूद व्यभिचार में लिप्त होना आदि पाया जाए, तो किसी की जान लेना जायज़ है। लेकिन यह काम शरई शासक का है।
हवाला
صحيح البخاري (4/ 10) (2766).
صحيح مسلم (1/ 92) (89).
شرح صحيح البخارى لابن بطال (8/ 489).
الملخص في شرح كتاب التوحيد، للشيخ صالح الفوزان (ص201).
यह हदीस HadeethEnc.com परعن عبد الله بن مسعود رضي الله عنه مرفوعًا: «ليس مِنْ نَفْسٍ تُقْتَلُ ظُلماً إِلاَّ كَان على ابنِ آدَمَ الأَوَّل كِفْلٌ مِن دمِهَا؛ لِأَنَّه كان أوَّل مَن سَنَّ القَتْلَ».
अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अंहु) रिवायत करते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "जो भी प्राणी अत्याचारपूर्ण तरीक़े से मारा जाता है, उसके क़त्ल के गुनाह का एक भाग आदम के पहले बेटे के हिस्से में जाता है। क्योंकि उसीने सबसे पहले नाहक़ कत्ल का तरीक़ा जारी किया।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह
यह हदीस बता रही है कि क्यों आदम के एक बेटे को, उसके बाद बहाए जाने वाले हर रक्त के गुनाह का एक भाग उठाना पड़ता है? कहा जाता है कि क़ाबील ने अपने भाई हाबील का द्वेषपूर्ण तरीक़े से वध कर दिया था और वही दोनों भाई आदम की संतान के पहले हत्यारे और पहले हत्या की भेंट चढ़ने वाले थे। चूँकि क़ाबील ने ही किसी की जान लेने की प्रथा की शुरूआत की थी, इसलिए वह अपने बाद बहाए जाने वाले हर रक्त के गुनाह के एक भाग का भागीदार होगा। क्योंकि उसके बाद रक्त बहाने वाला हर व्यक्ति उसी का अनुसरण कर रहा होता है।
हवाला
تطريز رياض الصالحين، فيصل بن عبد العزيز المبارك، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة للنشر والتوزيع، الرياض، الطبعة: الأولى 1423هـ، 2002م.
دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، محمد علي بن البكري بن علان، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، الطبعة: الرابعة 1425هـ.
رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين، أبو زكريا محيي الدين النووي، تحقيق ماهر الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، الطبعة: الأولى 1428هـ.
كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، كنوز إشبيليا، الرياض، الطبعة: الأولى 1430هـ.
صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ.
صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ.
यह हदीस HadeethEnc.com परعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضيَ اللهُ عنه قَالَ: جَاءَ رَجُلٌ إِلَى رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَقَالَ: يَا رَسُولَ اللهِ، أَرَأَيْتَ إِنْ جَاءَ رَجُلٌ يُرِيدُ أَخْذَ مَالِي؟ قَالَ: «فَلَا تُعْطِهِ مَالَكَ» قَالَ: أَرَأَيْتَ إِنْ قَاتَلَنِي؟ قَالَ: «قَاتِلْهُ» قَالَ: أَرَأَيْتَ إِنْ قَتَلَنِي؟ قَالَ: «فَأَنْتَ شَهِيدٌ»، قَالَ: أَرَأَيْتَ إِنْ قَتَلْتُهُ؟ قَالَ: «هُوَ فِي النَّارِ».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अनहु- कहते हैं कि एक व्यक्ति अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया और बोलाः ऐ अल्लाह के रसूल! ज़रा यह बताएँ कि यदि कोई व्यक्ति मेरा धन छीनना चाहे तो मैं क्या करूँ? फ़रमायाः उसे अपना धन न दो। उसने कहाः अगर मुझसे लड़ पड़े तो क्या करूँ? फ़रमायाः उससे लड़ो। उसने कहाः यदि मुझे मार डाले तो क्या होगा? फ़रमायाः तुम शहीद समझे जाओगे। उसने कहाः यदि मैं उसे मार डालूँ? फ़रमायाः वह जहन्नम जाएगा।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
صحيح مسلم (1/ 124) (140).
بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (2/ 449).
نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (2/ 936).
شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (5/ 389).
यह हदीस HadeethEnc.com परعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه قَالَ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: «كُلُّ أُمَّتِي مُعَافًى إِلَّا المُجَاهِرِينَ، وَإِنَّ مِنَ المُجَاهَرَةِ أَنْ يَعْمَلَ الرَّجُلُ بِاللَّيْلِ عَمَلًا، ثُمَّ يُصْبِحَ وَقَدْ سَتَرَهُ اللَّهُ عَلَيْهِ، فَيَقُولَ: يَا فُلاَنُ، عَمِلْتُ البَارِحَةَ كَذَا وَكَذَا، وَقَدْ بَاتَ يَسْتُرُهُ رَبُّهُ، وَيُصْبِحُ يَكْشِفُ سِتْرَ اللَّهِ عَنْهُ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "मेरी उम्मत के सभी लोगों को माफ़ कर दिया जाएगा, सिवाय उनके जो खुलम-खुल्ला गुनाह करते हैं। तथा खुलम-खुल्ला गुनाह करने का एक रूप यह है कि आदमी रात को कोई गुनाह करे और सुबह आए तो वह कहता फिरे कि ऐ अमुक! मैंने रात को ऐसा और ऐसा किया है, हालांकि अल्लाह ने उसे लोगों से छुपा रखा था। उसके रब ने रात भर उसके गुनाह को छिपा रखा, लेकिन उसने सुबह को अल्लाह के डाले हुए परदे को उठा दिया।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि इस बात की आशा रहती है कि अल्लाह गुनाह करने वाले मुसलमान को क्षमा कर दे। लेकिन ऐसा अभिमान एवं निर्लज्जता के साथ गुनाह करने वाले के साथ नहीं होता। वह व्यक्ति क्षमा का हक़दार नहीं है जो रात में गुनाह करे और सुबह लोगों को बताता फिरे कि उसने बीती रात अमुक गुनाह किया है, जबकि अल्लाह ने उसके गुनाह पर पर्दा डाल रखा था। पूरी रात अल्लाह ने उसपर पर्दा डाले रखा और सुबह उठकर उसने अल्लाह के डाले हुए पर्दे को उठा दिया।
फ़ायदे
- अल्लाह की ओर से पर्दा डाल दिए जाने के बाद गुनाह का एलान करने की बुराई।
- गुनाह का एलान करना भी ईमान वालों के बीच बुराई का प्रचार करना है।
- अल्लाह जिसकी कमियों पर दुनिया में पर्दा डालेगा, आख़िरत में भी डालेगा। यह दरअसल बंदों पर अल्लाह का बहुत बड़ा अनुग्रह है।
- जिससे कोई गुनाह हो जाए, वह अपने गुनाह को छुपाए और अल्लाह से तौबा करे।
- जो जानबूझकर गुनाहों का एलान करते फिरते हैं उनका गुनाह बहुत बड़ा होता है और इस तरह स्वयं को अल्लाह की क्षमा से वंचित कर लेते हैं।
हवाला
صحيح البخاري (8/ 20) (6069).
صحيح مسلم (4/ 2291) (2990).
شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (3/ 15).
منار القاري شرح مختصر صحيح البخاري، لحمزة قاسم (5/ 251).
بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 329).
نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين (1/ 255).
यह हदीस HadeethEnc.com परयहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com