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तशरीह के साथ हदीसें

क्या तुम जानते हो कि झूठ तथा मिथ्यारोपन क्या है? यह लोगों के बीच लगाई-बुझाई की बातें करते फिरना है।

عن ابن مسعود رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «ألا هل أُنَبِّئُكم ما العَضْهُ؟ هي النَّميمة القَالَةُ بين النّاس».
अबदुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः क्या तुम जानते हो कि झूठ तथा मिथ्यारोपन क्या है? यह लोगों के बीच लगाई-बुझाई की बातें करते फिरना है।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपनी उम्मत को लोगों के बीच चुगली करते फिरने और बिगाड़ पैदा करने के लिए एक की बात दूसरे तक पहुँचाने से सावधान करना चाहते थे। अतः, अपनी बात को प्रश्न से शुरू किया, ताकि दिल में अच्छी तरह बैठ जाए और लोग अधिक ध्यानपूर्वक सुनें। यही कारण है कि सहाबा से पूछा कि «العَضْهُ» अर्थात् झूठ और दोषारोपन क्या है? वैसे, कुछ लोगों ने उसका अर्थ जादू भी बताया है। फिर प्रश्न का उत्तर खुद ही देते हुए कहा कि «العَضْهُ» से अभिप्राय है लोगों के बीच लगाई-बुझाई करना, क्योंकि अनुभव यह कहता है कि इससे बिगाड़, लोगों को हानि पहुँचाने, प्रेम रखने वालों के दिलों को बाँटने, रिश्तेदारों के बीच दूरी पैदा करने तथा दिलों को मैला करने का वही काम होता है, जो जादू से होता है।

हवाला

صحيح مسلم، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب - الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. الجديد في شرح كتاب التوحيد - محمد بن عبد العزيز السليمان القرعاوي - دارسة وتحقيق: محمد بن أحمد سيد أحمد - مكتبة السوادي، جدة، المملكة العربية السعودية - الطبعة الخامسة، 1424هـ - 2003م. الملخص في شرح كتاب التوحيد، لصالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان، دار العاصمة، الرياض، الطبعة الأولى، 1422ه - 2001م. القول المفيد على كتاب التوحيد، لمحمد بن صالح بن محمد العثيمين - دار ابن الجوزي، المملكة العربية السعودية - الطبعة الثانية، 1424هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर
गुनाहों की मज़म्मत

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