अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने छोटे गुनाहों के मामले में लापरवाही बरतने और उनमें अधिक संलिप्त होने से मना किया है। क्योंकि ये छोटे-छोटे गुनाह मिलकर इन्सान के विनाश का कारण बन जाते हैं। आपने समझाने के लिए इसका उदाहरण यह दिया कि जैसे कुछ लोग किसी वादी में उतरे और हर व्यक्ति ने एक-एक छोटी-छोटी लकड़ी लाकर रख दी, जिससे इतनी लकड़ियाँ एकत्र हो गईं कि खाना बन जाए। फिर आपने बताया कि मामूली समझे जाने वाले गुनाह भी, जब उनसे तौबा न की जाए और अल्लाह की ओर से माफ़ी का परवाना न मिले, पकड़ होने पर विनाश का सबब बन जाते हैं।
- अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बात समझाने तथा अधिक स्पष्ट करने के लिए उदाहरण दिया करते थे।
- इस हदीस में छोटे-छोटे और मामूली गुनाहों से सचेत किया गया है और जल्द से जल्द क्षमा की व्यवस्था करने को प्रोत्साहित किया गया है।
- इस हदीस में आए हुए "छोटे-छोटे गुनाह" के कई अर्थ हो सकते हैं : 1- ऐसे गुनाह जिन्हें बंदा छोटे गुनाह समझकर करता है, लेकिन वो अल्लाह के यहाँ बड़े गुनाह हैं। 2- ऐसे छोटे-छोटे गुनाह जिन्हें बंदा लापरवाह होकर करता जाता है और तौबा भी नहीं करता। फिर, वो जब ज़्यादा हो जाते हैं, तो इन्सान का विनाश कर डालते हैं। 3- ऐसे छोटे-छोटे गुनाह जिन्हें बंदा लापरवाह होकर करता जाता है और वो बड़े विनाशकारी गुनाहों का कारण बन जाते हैं।
مسند أحمد (37/ 466) (22808). التيسير بشرح الجامع الصغير (1/ 405). فيض القدير (3/ 127).