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तशरीह के साथ हदीसें

जब तुममें से कोई जूता पहने, तो दाएँ पाँव से शुरू करे और जब जूता उतारे, तो बाएँ पाँव से शुरू करे। दाएँ पाँव में पहले जूता पहना जाए और बाद में उतारा जाए।

عن علي بن أبي طالب رضي الله عنه مرفوعاً: «إذا انْتَعَل أحدكم فليبدأ باليمين، وإذا نَزَعَ فليبدأ بالشمال، ولْتَكُن اليُمنى أولَهُما تُنْعَل، وآخِرَهُما تُنْزَع».
अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहु) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हुए कहते हैंः "जब तुममें से कोई जूता पहने, तो दाएँ पाँव से शुरू करे और जब जूता उतारे, तो बाएँ पाँव से शुरू करे। दाएँ पाँव में पहले जूता पहना जाए और बाद में उतारा जाए।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

जूता पहनने का मुसतहब तरीक़ा यह है कि पहले दाएँ पाँव में पहना जाए और जूता उतारने का मुसतहब तरीक़ा यह है कि पहले बाएँ पाँव का जूता उतारा जाए। क्योंकि इसमें दाएँ पाँव के सम्मान का पक्ष निहित है।

हवाला

منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان، دار ابن الجوزي. ط1، 1428هـ. توضِيحُ الأحكَامِ مِن بُلوُغ المَرَام، للبسام. مكتَبة الأسدي، مكّة المكرّمة، الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م. صحيح البخاري, تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري, تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر, دار طوق النجاة ترقيم محمد فؤاد عبدالباقي, ط 1422هـ. صحيح مسلم, تأليف: مسلم بن حجاج النيسابوري, تحقيق: محمد فؤاد عبدالباقي, دار إحياء التراث العربي.

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परिधान के आदाब

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com