तुममें से कोई एक जूता पहनकर न चले। या तो दोनों पहनकर चले या दोनों उतार दे।
عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «لا يمش أحدكم في نعل واحدة، لِيُنْعِلهما جميعًا، أو لِيَخْلَعْهُمَا جميعًا».
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः "तुममें से कोई एक जूता पहनकर न चले। या तो दोनों पहनकर चले या दोनों उतार दे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक जूता पहनकर चलने से मना किया है। इनसान या तो दोनों जूता पहनकर चले या फिर दोनों को उतारकर पैदल चले। यह शिष्टाचार इस बात का प्रमाण है कि इस्लामी शरीयत ने छोटी-छोटी बातों का भी ख़याल रखा है, और उसने जीवन के सभी भागों पर प्रकाश डाला है।
हवाला
صحيح البخاري، المحقق: محمد زهير بن ناصر الناصر، الناشر: دار طوق النجاة، الطبعة: الأولى 1422هـ.
صحيح مسلم بن الحجاج، المحقق: محمد فؤاد عبد الباقي، الناشر: دار إحياء التراث العربي، بيروت.
شرح رياض الصالحين، محمد بن صالح العثيمين، الناشر: دار الوطن للنشر، الطبعة: 1426 هـ.
فتح ذي الجلال والإكرام شرح بلوغ المرام،محمد بن صالح بن محمد العثيمين، تحقيق: صبحي بن محمد رمضان، وأُم إسراء بنت عرفة، المكتبة الإسلامية، القاهرة، الطبعة الأولى، 1427هـ.
توضيح الأحكام من بلوغ المرام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، مكتبة الأسدي، مكة، الطبعة الخامسة، 1423.
رياض الصالحين، للنووي، الطبعة الأولى، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428 هـ.
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