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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3888

नंबर 3888किताब 49, नंबर 288
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ غَالِبٍ، أَنَّ رَجُلاً، نَالَ مِنْ عَائِشَةَ عِنْدَ عَمَّارِ بْنِ يَاسِرٍ فَقَالَ اغْرُبْ مَقْبُوحًا مَنْبُوحًا أَتُؤْذِي حَبِيبَةَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Narrated 'Amr bin Ghalib:that a man spoke negatively of 'Aishah before 'Ammar bin Yasir so he said: "Be gone as one despicable and rejected! Do you insult the beloved of the Messenger of Allah (ﷺ)?
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif IsnaadAhmad Muhammad Shakir
  • Daif IsnaadAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।