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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3381

नंबर 3381किताब 48, नंबर 12
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ مَا مِنْ أَحَدٍ يَدْعُو بِدُعَاءٍ إِلاَّ آتَاهُ اللَّهُ مَا سَأَلَ أَوْ كَفَّ عَنْهُ مِنَ السُّوءِ مِثْلَهُ مَا لَمْ يَدْعُ بِإِثْمٍ أَوْ قَطِيعَةِ رَحِمٍ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ وَعُبَادَةَ بْنِ الصَّامِتِ ‏.‏
Jabir narrated that :the Messenger of Allah said: “There is none who utters a supplication, except that Allah gives him what he asked, or prevents evil from him that is equal to it – as long as he does not supplicate for something evil, or the cutting of ties of the womb.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAhmad Muhammad Shakir
  • HasanAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।