حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَرْزُوقٍ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ وَاقِدٍ، حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ عَطِيَّةَ اللَّيْثِيُّ، عَنْ شَهْرِ بْنِ حَوْشَبٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، رضى الله عنه قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " مَنْ سَرَّهُ أَنْ يَسْتَجِيبَ اللَّهُ لَهُ عِنْدَ الشَّدَائِدِ وَالْكُرَبِ فَلْيُكْثِرِ الدُّعَاءَ فِي الرَّخَاءِ " . قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ .
Abu Hurairah [may Allah be pleased with him] narrated that:The Messenger of Allah said: “Whoever wishes that Allah would respond to him during hardship and grief, then let him supplicate plentifully when at ease.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
HasanAhmad Muhammad Shakir
HasanAl-Albani
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।