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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3243

नंबर 3243किताब 47, नंबर 295
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ مُطَرِّفٍ، عَنْ عَطِيَّةَ الْعَوْفِيِّ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ كَيْفَ أَنْعَمُ وَقَدِ الْتَقَمَ صَاحِبُ الْقَرْنِ الْقَرْنَ وَحَنَى جَبْهَتَهُ وَأَصْغَى سَمْعَهُ يَنْتَظِرُ أَنْ يُؤْمَرَ أَنْ يَنْفُخَ فَيَنْفُخَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ الْمُسْلِمُونَ فَكَيْفَ نَقُولُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ ‏"‏ قُولُوا حَسْبُنَا اللَّهُ وَنِعْمَ الْوَكِيلُ تَوَكَّلْنَا عَلَى اللَّهِ رَبِّنَا ‏"‏ ‏.‏ وَرُبَّمَا قَالَ سُفْيَانُ عَلَى اللَّهِ تَوَكَّلْنَا ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ ‏.‏ وَقَدْ رَوَاهُ الأَعْمَشُ أَيْضًا عَنْ عَطِيَّةَ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ ‏.‏
अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: मैं कैसे चैन से रह सकता हूँ, जबकि सूर फूँकने पर नियुक्त फ़रिश्ते ने सूर को मुँह से लगा रखा है और (सूर फूँकने की तैयारी के तौर पर) अपनी पेशानी को झुका रखा है और आदेश की प्रतीक्षा में कान लगा रखा है कि आदेश मिलते ही सूर फूँक दे। मुसलमानों ने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! ऐसे में हम क्या कहें? तो आपने फ़रमाया: तुम कहा करोः حسبُنا اللهُ ونِعْمَ الوَكيلُ توكَّلنا على اللهِ ربِّنا" (हमारे लिए अल्लाह काफ़ी है और वह अच्छा काम बनाने वाला है। हमने अल्लाह पर भरोसा किया, जो हमारा रब है।) कभी- कभी सुफ़यान "توكَّلنا على اللهِ" के स्थान पर कहते थेः "على الله توكَّلنا"।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 47 · Chapters on Tafsir

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।