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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 476

नंबर 476किताब 3, नंबर 24
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى الْبَصْرِيُّ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، عَنْ نَهَّاسِ بْنِ قَهْمٍ، عَنْ شَدَّادٍ أَبِي عَمَّارٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ حَافَظَ عَلَى شُفْعَةِ الضُّحَى غُفِرَ لَهُ ذُنُوبُهُ وَإِنْ كَانَتْ مِثْلَ زَبَدِ الْبَحْرِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَقَدْ رَوَى وَكِيعٌ وَالنَّضْرُ بْنُ شُمَيْلٍ وَغَيْرُ وَاحِدٍ مِنَ الأَئِمَّةِ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ نَهَّاسِ بْنِ قَهْمٍ وَلاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ حَدِيثِهِ ‏.‏
Abu Hurairah narrated that :Allah's Messenger said: "Whoever continuously performs the two Rak'ah of Ad-Duha his sins will be forgiven, even if they be like the foam of the sea
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 3 · The Book on Al-Witr

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।