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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 477

नंबर 477किताब 3, नंबर 25
حَدَّثَنَا زِيَادُ بْنُ أَيُّوبَ الْبَغْدَادِيُّ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَبِيعَةَ، عَنْ فُضَيْلِ بْنِ مَرْزُوقٍ، عَنْ عَطِيَّةَ الْعَوْفِيِّ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، قَالَ كَانَ نَبِيُّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي الضُّحَى حَتَّى نَقُولَ لاَ يَدَعُ وَيَدَعُهَا حَتَّى نَقُولَ لاَ يُصَلِّي ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏
Abu Sa'eed Al-Khudri narrated:"The Prophet would pray Ad-Duha until we would say: 'He will not leave it.' And he would leave it until we would say: 'He will not pray it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 3 · The Book on Al-Witr

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।