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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 382

नंबर 382किताब 2, नंबर 234
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ الضَّبِّيُّ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ مَيْمُونٍ أَبِي حَمْزَةَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ نَحْوَهُ وَقَالَ غُلاَمٌ لَنَا يُقَالُ لَهُ رَبَاحٌ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَحَدِيثُ أُمِّ سَلَمَةَ إِسْنَادُهُ لَيْسَ بِذَاكَ ‏.‏ وَمَيْمُونٌ أَبُو حَمْزَةَ قَدْ ضَعَّفَهُ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ ‏.‏ وَاخْتَلَفَ أَهْلُ الْعِلْمِ فِي النَّفْخِ فِي الصَّلاَةِ فَقَالَ بَعْضُهُمْ إِنْ نَفَخَ فِي الصَّلاَةِ اسْتَقْبَلَ الصَّلاَةَ ‏.‏ وَهُوَ قَوْلُ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ وَأَهْلِ الْكُوفَةِ ‏.‏ وَقَالَ بَعْضُهُمْ يُكْرَهُ النَّفْخُ فِي الصَّلاَةِ وَإِنْ نَفَخَ فِي صَلاَتِهِ لَمْ تَفْسُدْ صَلاَتُهُ ‏.‏ وَهُوَ قَوْلُ أَحْمَدَ وَإِسْحَاقَ ‏.‏
(Another chain) in which Abu Hamzah narrated:"A boy of ours named Rabah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।