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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 383

नंबर 383किताब 2, नंबर 235
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، عَنْ هِشَامِ بْنِ حَسَّانَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم نَهَى أَنْ يُصَلِّيَ الرَّجُلُ مُخْتَصِرًا ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنِ ابْنِ عُمَرَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَبِي هُرَيْرَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَقَدْ كَرِهَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ الاِخْتِصَارَ فِي الصَّلاَةِ ‏.‏ وَكَرِهَ بَعْضُهُمْ أَنْ يَمْشِيَ الرَّجُلُ مُخْتَصِرًا ‏.‏ وَالاِخْتِصَارُ أَنْ يَضَعَ الرَّجُلُ يَدَهُ عَلَى خَاصِرَتِهِ فِي الصَّلاَةِ أَوْ يَضَعَ يَدَيْهِ جَمِيعًا عَلَى خَاصِرَتَيْهِ ‏.‏ وَيُرْوَى أَنَّ إِبْلِيسَ إِذَا مَشَى مَشَى مُخْتَصِرًا ‏.‏
Abu Hurairah narrated:"The Prophet (S) prohibited than a man to pray with his hands on his hip
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।