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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1129

नंबर 1129किताब 11, नंबर 51
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ، عَنْ أَبِي وَهْبٍ الْجَيْشَانِيِّ، أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ فَيْرُوزَ الدَّيْلَمِيَّ، يُحَدِّثُ عَنْ أَبِيهِ، قَالَ أَتَيْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي أَسْلَمْتُ وَتَحْتِي أُخْتَانِ ‏.‏ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ اخْتَرْ أَيَّتَهُمَا شِئْتَ ‏"‏ ‏.‏
Abu Wahb Al-Jaishani narrated that:He heard Ibn Fairuz Ad-Dhailami narrating from his father: "I went to the Prophet and said: 'O Messenger of Allah! I accepted Islam and I had two sisters (as wives).' So the Messenger of Allah said: 'Chose whichever of them you will
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAhmad Muhammad Shakir
  • HasanAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Book on Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।