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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1128

नंबर 1128किताब 11, नंबर 50
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ، حَدَّثَنَا عَبْدَةُ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي عَرُوبَةَ، عَنْ مَعْمَرٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ غَيْلاَنَ بْنَ سَلَمَةَ الثَّقَفِيَّ، أَسْلَمَ وَلَهُ عَشْرُ نِسْوَةٍ فِي الْجَاهِلِيَّةِ فَأَسْلَمْنَ مَعَهُ فَأَمَرَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم أَنْ يَتَخَيَّرَ أَرْبَعًا مِنْهُنَّ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَكَذَا رَوَاهُ مَعْمَرٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِ ‏.‏ قَالَ وَسَمِعْتُ مُحَمَّدَ بْنَ إِسْمَاعِيلَ يَقُولُ هَذَا حَدِيثٌ غَيْرُ مَحْفُوظٍ وَالصَّحِيحُ مَا رَوَى شُعَيْبُ بْنُ أَبِي حَمْزَةَ وَغَيْرُهُ عَنِ الزُّهْرِيِّ قَالَ حُدِّثْتُ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سُوَيْدٍ الثَّقَفِيِّ أَنَّ غَيْلاَنَ بْنَ سَلَمَةَ أَسْلَمَ وَعِنْدَهُ عَشْرُ نِسْوَةٍ ‏.‏ قَالَ مُحَمَّدٌ وَإِنَّمَا حَدِيثُ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ رَجُلاً مِنْ ثَقِيفٍ طَلَّقَ نِسَاءَهُ فَقَالَ لَهُ عُمَرُ لَتُرَاجِعَنَّ نِسَاءَكَ أَوْ لأَرْجُمَنَّ قَبْرَكَ كَمَا رُجِمَ قَبْرُ أَبِي رِغَالٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَالْعَمَلُ عَلَى حَدِيثِ غَيْلاَنَ بْنِ سَلَمَةَ عِنْدَ أَصْحَابِنَا مِنْهُمُ الشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَاقُ ‏.‏
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) का वर्णन है कि ग़ैलान बिन सलमा सक़फ़ी मुसलमान हो गए और उनके पास जाहिलियत काल में दस स्त्रियाँ थीं, जो उनके साथ मुसलमान हो गईं, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उन्हें आदेश दिया कि उनमें से चार को चुन लें (तथा बाकी को तलाक दे दें)।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihBashar Awad Maarouf
  • HasanZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 11 · The Book on Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।