सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1130

नंबर 1130किताब 11, नंबर 52
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا وَهْبُ بْنُ جَرِيرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي قَالَ، سَمِعْتُ يَحْيَى بْنَ أَيُّوبَ، يُحَدِّثُ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ، عَنْ أَبِي وَهْبٍ الْجَيْشَانِيِّ، عَنِ الضَّحَّاكِ بْنِ فَيْرُوزَ الدَّيْلَمِيِّ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي أَسْلَمْتُ وَتَحْتِي أُخْتَانِ ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ اخْتَرْ أَيَّتَهُمَا شِئْتَ ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ ‏.‏ وَأَبُو وَهْبٍ الْجَيْشَانِيُّ اسْمُهُ الدَّيْلَمُ بْنُ هُوشَعَ ‏.‏
Abu Wahb Al-Jaishani narrated from Ad-Dhahhak bin Fairuz Ad-Dailami from his father:"I said: 'O Messenger of Allah! I accepted Islam and I had two sisters (as wives).' So Messenger of Allah said: 'Chose whichever of them you will
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Book on Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।