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सुनन नसाई

नंबर 5518

नंबर 5518किताब 50, नंबर 91
أَخْبَرَنَا مَحْمُودُ بْنُ خَالِدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَمْرٍو، عَنْ يَحْيَى، أَنَّهُ حَدَّثَهُ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو سَلَمَةَ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ تَعَوَّذُوا بِاللَّهِ مِنْ عَذَابِ النَّارِ وَعَذَابِ الْقَبْرِ وَمِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ وَمِنْ شَرِّ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Hurairah said:The Messenger of Allah [SAW] said: "Seek refuge with Allah from the torment of the Fire and the torment of the grave, from the trials of life and death, and from the evil of Al-Masihid-Dajjal
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Seeking Refuge with Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।