सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 5517

नंबर 5517किताब 50, नंबर 90
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ أَنْبَأَنَا أَبُو عَامِرٍ الْعَقَدِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ بُدَيْلِ بْنِ مَيْسَرَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَقِيقٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَتَعَوَّذُ مِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ وَعَذَابِ الْقَبْرِ وَالْمَسِيحِ الدَّجَّالِ ‏.‏
It was narrated that Abu Hurairah said:"The Messenger of Allah [SAW] used to seek refuge (with Allah) from the torment of Hell, the torment of the grave, and Al-Masihid-Dajjal
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Seeking Refuge with Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।