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सुनन नसाई

नंबर 5508

नंबर 5508किताब 50, नंबर 81
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، وَمَالِكٌ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ عُوذُوا بِاللَّهِ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ عُوذُوا بِاللَّهِ مِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ عُوذُوا بِاللَّهِ مِنْ فِتْنَةِ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that:The Prophet [SAW] said: "Seek refuge with Allah from the torment of the grave, seek refuge with Allah from the trials of life and death, and seek refuge with Allah from the tribulation of Al-Masihid-Dajjal
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Seeking Refuge with Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।