सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 5507

नंबर 5507किताब 50, नंबर 80
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ عَوْنٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِي عُمَرَ، عَنْ عُبَيْدِ بْنِ خَشْخَاشٍ، عَنْ أَبِي ذَرٍّ، قَالَ دَخَلْتُ الْمَسْجِدَ وَرَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِيهِ فَجِئْتُ فَجَلَسْتُ إِلَيْهِ فَقَالَ ‏"‏ يَا أَبَا ذَرٍّ تَعَوَّذْ بِاللَّهِ مِنْ شَرِّ شَيَاطِينِ الْجِنِّ وَالإِنْسِ ‏"‏ ‏.‏ قُلْتُ أَوَلِلإِنْسِ شَيَاطِينُ قَالَ ‏"‏ نَعَمْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Dharr said:"I entered the Masjid and the Messenger of Allah [SAW] was there, so I came and sat before him and he said: 'O Abu Dharr, seek refuge with Allah from the evils of the devils among the Jinn and mankind.' I said: 'Are there devils among mankind?' He said: 'Yes
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif IsnaadAbu Ghuddah
  • Daif IsnaadAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Seeking Refuge with Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।