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सुनन नसाई

नंबर 5509

नंबर 5509किताब 50, नंबर 82
أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، قَالَ أَخْبَرَنِي يَعْلَى بْنُ عَطَاءٍ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا عَلْقَمَةَ، يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَتَعَوَّذُ مِنْ خَمْسٍ يَقُولُ ‏ "‏ عُوذُوا بِاللَّهِ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ وَمِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ وَمِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ وَمِنْ شَرِّ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that:The Messenger of Allah [SAW] used to seek refuge with Allah from five things, saying: "Seek refuge with Allah from the torment of the grave, and from the torment of Hell, and from the trials of life and death, and from the evil of Al-Masihid-Dajjal
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Seeking Refuge with Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।