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सुनन नसाई

नंबर 4435

नंबर 4435किताब 43, नंबर 75
أَخْبَرَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ مُغِيرَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا حُمَيْدُ بْنُ هِلاَلٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُغَفَّلٍ، قَالَ دُلِّيَ جِرَابٌ مِنْ شَحْمٍ يَوْمَ خَيْبَرَ فَالْتَزَمْتُهُ قُلْتُ لاَ أُعْطِي أَحَدًا مِنْهُ شَيْئًا فَالْتَفَتُّ فَإِذَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَتَبَسَّمُ ‏.‏
Abdullah bin Mughaffal said:"A bag of fat was thrown on the day of Khaibar, and I caught it and said: "I will not give anything of this to anyone.' I turned around and saw the Messenger of Allah there, smiling." (Sahih)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of ad-Dahaya (Sacrifices)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।