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सुनन नसाई

नंबर 4434

नंबर 4434किताब 43, नंबर 74
أَخْبَرَنَا سُوَيْدُ بْنُ نَصْرٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ، عَنِ ابْنِ عَوْنٍ، عَنِ ابْنِ سِيرِينَ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، قَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ إِمْسَاكِ الأُضْحِيَةِ فَوْقَ ثَلاَثَةِ أَيَّامٍ ثُمَّ قَالَ ‏ "‏ كُلُوا وَأَطْعِمُوا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu sa'eed Al-aKhudri said:"The Messenger of Allah forbade keeping the meat of the sacrificial animals for more than three days, then he said: 'Eat and feed other,"' (Sahih)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of ad-Dahaya (Sacrifices)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।