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सुनन नसाई

नंबर 4436

नंबर 4436किताब 43, नंबर 76
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ حَدَّثَنَا النَّضْرُ بْنُ شُمَيْلٍ، قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ نَاسًا، مِنَ الأَعْرَابِ كَانُوا يَأْتُونَا بِلَحْمٍ وَلاَ نَدْرِي أَذَكَرُوا اسْمَ اللَّهِ عَلَيْهِ أَمْ لاَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ اذْكُرُوا اسْمَ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ عَلَيْهِ وَكُلُوا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from 'Aishah that:some Bedouin people used to bring us meat, and we did not know whether they had mentioned the Name of Allah (when slaughtering it) or not. The Messenger of Allah said: "Messenger of Allah said: "Mention the Name of Allah and eat." (Sahih)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of ad-Dahaya (Sacrifices)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।