أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ نَاصِحٍ، قَالَ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُضَحِّي بِكَبْشَيْنِ أَمْلَحَيْنِ أَقْرَنَيْنِ وَكَانَ يُسَمِّي وَيُكَبِّرُ وَلَقَدْ رَأَيْتُهُ يَذْبَحُهُمَا بِيَدِهِ وَاضِعًا رِجْلَهُ عَلَى صِفَاحِهِمَا .
Anas bin Malik said:"The Messenger of Allah used to sacrifice two pronounce the name of Allah and say: 'Allah Akabar,' and I saw him slaughtering them with his own hand, and placing his foot on their sides "(Sahih)
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAbu Ghuddah
SahihAl-Albani
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।