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सुनन नसाई

नंबर 4415

नंबर 4415किताब 43, नंबर 55
أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ مَسْعُودٍ، قَالَ حَدَّثَنَا خَالِدٌ، عَنْ شُعْبَةَ، أَخْبَرَنِي قَتَادَةُ، قَالَ سَمِعْتُ أَنَسًا، قَالَ ضَحَّى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِكَبْشَيْنِ أَمْلَحَيْنِ أَقْرَنَيْنِ يُكَبِّرُ وَيُسَمِّي وَلَقَدْ رَأَيْتُهُ يَذْبَحُهُمَا بِيَدِهِ وَاضِعًا عَلَى صِفَاحِهِمَا قَدَمَهُ ‏.‏ قُلْتُ أَنْتَ سَمِعْتَهُ مِنْهُ قَالَ نَعَمْ ‏.‏
Anas said:"The Messenger of Allah sacrificed two horned, Amlah rams, saying: 'Allah Akbar and pronouncing the Name of Allah. I saw him slaughtering them with his own hand, and placing his foot on their sides." I said: You heard it from Him? He said: Yes. (Sahih)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of ad-Dahaya (Sacrifices)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।