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सुनन नसाई

नंबर 4407

नंबर 4407किताब 43, नंबर 47
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جَعْفَرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، قَالَ سَمِعْتُ حَاضِرَ بْنَ الْمُهَاجِرِ الْبَاهِلِيَّ، قَالَ سَمِعْتُ سُلَيْمَانَ بْنَ يَسَارٍ، يُحَدِّثُ عَنْ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ، أَنَّ ذِئْبًا، نَيَّبَ فِي شَاةٍ فَذَبَحُوهَا بِمَرْوَةٍ فَرَخَّصَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فِي أَكْلِهَا ‏.‏
It was narrated from Zaid bin Thabit that:a wolf attacked a sheep so they slaughtered it with a Marwah, and the Prophet allowed it to be eaten
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of ad-Dahaya (Sacrifices)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।