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सुनन नसाई

नंबर 4408

नंबर 4408किताब 43, नंबर 48
أَخْبَرَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، عَنْ حَمَّادِ بْنِ سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي الْعُشَرَاءِ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَمَا تَكُونُ الذَّكَاةُ إِلاَّ فِي الْحَلْقِ وَاللَّبَّةِ قَالَ ‏ "‏ لَوْ طَعَنْتَ فِي فَخِذِهَا لأَجْزَأَكَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Ushara' that his father said:"I said: "O Messenger of Allah, is slaughtering only in the throat or upper chest?" He said: 'If you stab it in the thigh, that will suffice,"'(Daif)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of ad-Dahaya (Sacrifices)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।