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सुनन नसाई

नंबर 3709

नंबर 3709किताब 33, नंबर 4
أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ وَهْبٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو عَبْدِ الرَّحِيمِ، قَالَ حَدَّثَنِي زَيْدٌ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ طَاوُسٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تُرْقِبُوا أَمْوَالَكُمْ فَمَنْ أَرْقَبَ شَيْئًا فَهُوَ لِمَنْ أُرْقِبَهُ ‏"‏ ‏.‏
Zaid narrated from Abu Az-Zubair, from Tawus, from Ibn 'Abbas that the Messenger of Allah said:"Do not give away your property on the basis of Ruqba, for whoever gives a gift on that basis, it belongs to the one to whom he gave it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book of ar-Ruqba

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।