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सुनन नसाई

नंबर 3710

नंबर 3710किताब 33, नंबर 5
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَرْبٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنْ حَجَّاجٍ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ طَاوُسٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ الْعُمْرَى جَائِزَةٌ لِمَنْ أُعْمِرَهَا وَالرُّقْبَى جَائِزَةٌ لِمَنْ أُرْقِبَهَا وَالْعَائِدُ فِي هِبَتِهِ كَالْعَائِدِ فِي قَيْئِهِ ‏"‏ ‏.‏
Hajjaj narrated from Abu Az-Zubair, from Tawus, from Ibn 'Abbas, who said:"The Messenger of Allah said: 'Umra (life-long gift) is permissible for the one to whom it is given, and Ruqba is permissible to the one to whom it is given, and the one who takes back his gift is like the one who goes back to his vomit
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book of ar-Ruqba

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।