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सुनन नसाई

नंबर 3708

नंबर 3708किताब 33, नंबर 3
أَخْبَرَنَا زَكَرِيَّا بْنُ يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْجَبَّارِ بْنُ الْعَلاَءِ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ ابْنِ أَبِي نَجِيحٍ، عَنْ طَاوُسٍ، لَعَلَّهُ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ لاَ رُقْبَى فَمَنْ أُرْقِبَ شَيْئًا فَهُوَ سَبِيلُ الْمِيرَاثِ ‏.‏
Zakariyya bin Yahya informed us, he said:"Abdul-Jabbar bin Al-'Ala' narrated to us, he said: 'Sufyan narrated to us from Ibn Abi Najih, from Tawus, and perhaps it is from Ibn 'Abbas, who said: There is no Ruqba, and whoever gives a gift on the basis of Ruqba, it is part of his estate
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book of ar-Ruqba

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।