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सुनन नसाई

नंबर 3707

नंबर 3707किताब 33, नंबर 2
أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عَلِيِّ بْنِ مَيْمُونٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ، - وَهُوَ ابْنُ يُوسُفَ - قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ ابْنِ أَبِي نَجِيحٍ، عَنْ طَاوُسٍ، عَنْ رَجُلٍ، عَنْ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم جَعَلَ الرُّقْبَى لِلَّذِي أُرْقِبَهَا ‏.‏
Muhammad bin 'Ali bin Maimun informed us, he said:"Muhammad -he is, Ibn Yusuf- narrated to us, he said: 'Sufyan narrated to us from Ibn Abi Najih, from Tawus, from a man, from Zaid bin Thabit that the Prophet ruled that the Ruqba belongs to the one to whom it is given
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book of ar-Ruqba

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।