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सुनन नसाई

नंबर 3337

नंबर 3337किताब 26, नंबर 142
أَخْبَرَنَا هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ حَدَّثَنَا مَعْنٌ، قَالَ حَدَّثَنَا مَالِكٌ، عَنْ نَافِعٍ، ح وَالْحَارِثُ بْنُ مِسْكِينٍ قِرَاءَةً عَلَيْهِ وَأَنَا أَسْمَعُ، عَنِ ابْنِ الْقَاسِمِ، قَالَ مَالِكٌ حَدَّثَنِي نَافِعٌ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنِ الشِّغَارِ وَالشِّغَارُ أَنْ يُزَوِّجَ الرَّجُلُ الرَّجُلَ ابْنَتَهُ عَلَى أَنْ يُزَوِّجَهُ ابْنَتَهُ وَلَيْسَ بَيْنَهُمَا صَدَاقٌ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Umar that the Messenger of Allah forbade Ash-Shighar. Ash-Shighar means when a man marries his daughter to another man, on the condition that that man marries his daughter to him, and no dowry is exchanged between them
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 26 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।