सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 3336

नंबर 3336किताब 26, नंबर 141
أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ، عَنِ الْفَزَارِيِّ، عَنْ حُمَيْدٍ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ جَلَبَ وَلاَ جَنَبَ وَلاَ شِغَارَ فِي الإِسْلاَمِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ هَذَا خَطَأٌ فَاحِشٌ وَالصَّوَابُ حَدِيثُ بِشْرٍ ‏.‏
It was narrated that Anas said:"The Messenger of Allah said: 'There is no 'bringing', no 'avoidance' and no Shighar in Islam, and whoever robs, he is not one of us
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 26 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।