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सुनन नसाई

नंबर 3338

नंबर 3338किताब 26, नंबर 143
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ سَلاَّمٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ الأَزْرَقُ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَنِ الشِّغَارِ ‏.‏ قَالَ عُبَيْدُ اللَّهِ وَالشِّغَارُ كَانَ الرَّجُلُ يُزَوِّجُ ابْنَتَهُ عَلَى أَنْ يُزَوِّجَهُ أُخْتَهُ ‏.‏
It was narrated that Abu Hurairah said:"The Messenger of Allah forbade Ash-Shighar." (One of the narrators) 'Ubaidullah said: "Ash-Shighar means when a man gives his daughter in marriage on condition that (the other man) gives him his sister in marriage
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 26 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।