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सुनन नसाई

नंबर 3140

नंबर 3140किताब 25, नंबर 56
أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ هِلاَلٍ الْحِمْصِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حِمْيَرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ سَلاَّمٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ بْنِ عَمَّارٍ، عَنْ شَدَّادٍ أَبِي عَمَّارٍ، عَنْ أَبِي أُمَامَةَ الْبَاهِلِيِّ، قَالَ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ أَرَأَيْتَ رَجُلاً غَزَا يَلْتَمِسُ الأَجْرَ وَالذِّكْرَ مَا لَهُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ لاَ شَىْءَ لَهُ ‏"‏ ‏.‏ فَأَعَادَهَا ثَلاَثَ مَرَّاتٍ يَقُولُ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ لاَ شَىْءَ لَهُ ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ قَالَ ‏"‏ إِنَّ اللَّهَ لاَ يَقْبَلُ مِنَ الْعَمَلِ إِلاَّ مَا كَانَ لَهُ خَالِصًا وَابْتُغِيَ بِهِ وَجْهُهُ ‏"‏ ‏.‏
अबू उमामा बाहिली रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : एक व्यक्ति अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया और पूछा : ऐसे व्यक्ति के बारे में आपकी क्या राय है, जो जिहाद में प्रतिफल एवं शोहरत दोनों की चाहत में शरीक होता है? उसे क्या मिलेगा? अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जवाब दिया : "उसे कुछ नहीं मिलेगा।" उसने अपना सवाल तीन बार दोहराया और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हर बार कह दिया कि "उसे कुछ नहीं मिलेगा।" फिर फ़रमाया : "अल्लाह ग्रहण उसी कार्य को करता है, जो विशुद्ध रूप से उसी के लिए उसी की प्रसन्नता की प्राप्ति के लिए किया गया हो।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAbu Ghuddah
  • Hasan SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 25 · The Book of Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।