अबू उमामा बाहिली रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : एक व्यक्ति अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया और पूछा : ऐसे व्यक्ति के बारे में आपकी क्या राय है, जो जिहाद में प्रतिफल एवं शोहरत दोनों की चाहत में शरीक होता है? उसे क्या मिलेगा? अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जवाब दिया : "उसे कुछ नहीं मिलेगा।" उसने अपना सवाल तीन बार दोहराया और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हर बार कह दिया कि "उसे कुछ नहीं मिलेगा।" फिर फ़रमाया : "अल्लाह ग्रहण उसी कार्य को करता है, जो विशुद्ध रूप से उसी के लिए उसी की प्रसन्नता की प्राप्ति के लिए किया गया हो।"
इसे नसई ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
एक व्यक्ति अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में पूछने आया, जो जिहाद में अल्लाह के यहाँ प्रितफल प्राप्त करने और लोगों की प्रशंसा बटोरने के लिए शामिल होता हो। दरअसल वह जानना चाहता था कि ऐसे व्यक्ति को अल्लाह के यहाँ प्रतिफल मिलेगा या नहीं? चुनांचे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उत्तर दिया कि उसे अल्लाह के यहाँ कोई प्रतिफल नहीं मिलेगा। क्योंकि उसने अपनी नीयत में अल्लाह के सिवा को शामिल कर लिया। उस व्यक्ति ने अपना यह सवाल अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सामने तीन बार रखा और आपने हर बार यही जवाब दिया कि उसे कोई प्रतिफल नहीं मिलेगा। उसके बाद अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अल्लाह के यहाँ किसी कार्य के ग्रहण होने या न होने के संबंध में एक सिद्धांत बता दिया। सिद्धांत यह है कि अल्लाह केवल उसी कार्य को ग्रहण करता है, जिसे विशुद्ध रूप से उसके लिए और उसकी प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए किया गया हो तथा उसमें किसी को साझी न बनाया गया हो।
फ़ायदे
अल्लाह के यहाँ केवल वही अमल स्वीकार होता है, जो विशुद्ध रूप से अल्लाह के लिए और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के तरीक़े के मुताबिक़ किया जाए।
मुफ़ती के उत्तर की एक सुंदरता यह होनी चाहिए कि वह प्रश्न करने वाले के उद्देश्य को न केवल पूरा करता हो, बल्कि कुछ अतिरिक्त बातें भी कह देता हो।
किसी महत्वपूर्ण बात की पुष्टि के लिए उसके बारे में बार-बार पूछा जा सकता है।
सही मायने में मुजाहिद वह है, जो सच्ची नीयत के साथ अल्लाह के दीन को ऊँचा करने और आख़िरत में मिलने वाला प्रतिफल प्राप्त करने के लिए जिहाद में शरीक हो। उसका जिहाद दुनिया प्राप्त करने के लिए न हो।
हवाला
سنن النسائي (6/ 25) (3140)، الترغيب والترهيب (2/194)، جامع العلوم والحكم (1/75)، نيل الأوطار (7/245)، ذخيرة العقبى في شرح المجتبى (26/205).
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com