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तशरीह के साथ हदीसें

खुले तौर पर क़ुरआन पढ़ने वाला खुले तौर पर सदक़ा करने वाले की तरह है। जबकि छुपाकर क़ुरआन पढ़ने वाला छुपाकर सदक़ा करने वाले की तरह है।

عن عُقبة بن عامر الجُهني رضي الله عنه قال: قال رسولُ الله صلَّى الله عليه وسلم: «الجاهِرُ بالقرآن كالجاهِرِ بالصَّدَقَةِ، والمُسِرُّ بالقرآن كالمُسِرِّ بالصَّدَقَة».
उक़बा बिन आमिर जुहनी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "खुले तौर पर क़ुरआन पढ़ने वाला खुले तौर पर सदक़ा करने वाले की तरह है। जबकि छुपाकर क़ुरआन पढ़ने वाला छुपाकर सदक़ा करने वाले की तरह है।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और नसई ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

इस हदीस में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि खुले तौर पर क़ुरआन पढ़ने वाला खुले तौर पर सदक़ा करने वाले की तरह है। जबकि छुपाकर क़ुरआन पढ़ने वाला छुपाकर सदक़ा करने वाले की तरह है।

फ़ायदे
  1. छुपाकर क़ुरआन पढ़ना उत्तम है, जैसे कि छुपाकर सदक़ा करना उत्तम है। क्योंकि इसमें इख़लास (निष्ठा) होता है और रिया तथा अभिमान से दूरी होती है। हाँ, अगर खुले तौर पर करने की ज़रूरत एवं मसलहत हो, जैसे क़ुरआन की शिक्षा देना आदि, तो बात अलग है।
हवाला

سنن أبي داود (2/ 494) (1333)، سنن الترمذي (5/ 40) (2919)، سنن النسائي (5/ 80) (2561)، الكاشف عن حقائق السُّنن (5/1688)، شرح أبي داود للعيني (5/238)، تحفة الأحوذي (8/ 191)، التنوير في شرح الجامع الصغير (5/286).

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पवित्र क़ुरआन की फ़ज़ीलतें

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com