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सुनन नसाई

नंबर 3139

नंबर 3139किताब 25, नंबर 55
أَخْبَرَنِي هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ، قَالَ أَنْبَأَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ جَبَلَةَ بْنِ عَطِيَّةَ، عَنْ يَحْيَى بْنِ الْوَلِيدِ، عَنْ عُبَادَةَ بْنِ الصَّامِتِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ غَزَا وَهُوَ لاَ يُرِيدُ إِلاَّ عِقَالاً فَلَهُ مَا نَوَى ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from 'Ubadah bin As-Samit that the Messenger of Allah (ﷺ) said:"Whoever fights seeking only an 'Iqbal, then he will have what he intended
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAbu Ghuddah
  • HasanAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · The Book of Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।