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सुनन नसाई

नंबर 3081

नंबर 3081किताब 24, नंबर 464
أَخْبَرَنَا هِلاَلُ بْنُ الْعَلاَءِ بْنِ هِلاَلٍ، قَالَ حَدَّثَنَا حُسَيْنٌ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو خَيْثَمَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا خُصَيْفٌ، عَنْ مُجَاهِدٍ، وَعَطَاءٍ، وَسَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ الْفَضْلَ، أَخْبَرَهُ أَنَّهُ، كَانَ رَدِيفَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَأَنَّهُ لَمْ يَزَلْ يُلَبِّي حَتَّى رَمَى الْجَمْرَةَ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Abbas that:Al-Fadl to him that he roed behind the Messenger of Allah and he continued to recited the Talbiyah until eh stoned the Jamrat
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।