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सुनन नसाई

नंबर 3082

नंबर 3082किताब 24, नंबर 465
أَخْبَرَنَا أَبُو عَاصِمٍ، خُشَيْشُ بْنُ أَصْرَمَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ مَعْبَدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ أَعْيَنَ، عَنْ عَبْدِ الْكَرِيمِ الْجَزَرِيِّ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنِ الْفَضْلِ بْنِ الْعَبَّاسِ، أَنَّهُ كَانَ رَدِيفَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَلَمْ يَزَلْ يُلَبِّي حَتَّى رَمَى جَمْرَةَ الْعَقَبَةِ ‏.‏
It was narrated from Al-Fadl bin 'Abbas that:he was riding behind the Prophet and he continued recite the Talbiyah until he stoned Jamratul Aqabah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।