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सुनन नसाई

नंबर 3063

नंबर 3063किताब 24, नंबर 446
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى بْنِ أَيُّوبَ بْنِ إِبْرَاهِيمَ الثَّقَفِيُّ الْمَرْوَزِيُّ، قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِدْرِيسَ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ رَمَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الْجَمْرَةَ يَوْمَ النَّحْرِ ضُحًى وَرَمَى بَعْدَ يَوْمِ النَّحْرِ إِذَا زَالَتِ الشَّمْسُ ‏.‏
It was narrated that Jabir said:"The Messenger of Allah stoned the Jamrat on the Day of Sacrifice in the forenoon, and after the Day of Sacrifice he stoned (the Jamarat) When the sun had passed its zenith
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।