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सुनन नसाई

नंबर 3064

नंबर 3064किताब 24, नंबर 447
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يَزِيدَ الْمُقْرِئُ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ، عَنْ سَلَمَةَ بْنِ كُهَيْلٍ، عَنِ الْحَسَنِ الْعُرَنِيِّ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ بَعَثَنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أُغَيْلِمَةَ بَنِي عَبْدِ الْمُطَّلِبِ عَلَى حُمُرَاتٍ يَلْطَحُ أَفْخَاذَنَا وَيَقُولُ ‏ "‏ أُبَيْنِيَّ لاَ تَرْمُوا جَمْرَةَ الْعَقَبَةِ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn Abbas said:"The Messenger ofAllah sent us young boys of Banu Abdul-Muttalib on donkeys, stalping our things and saying "O my sons, do not stone Jamratulal Aqabah until the sun has risen. (Daif)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।