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सुनन नसाई

नंबर 3035

नंबर 3035किताब 24, नंबर 418
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَطَاءٌ، عَنْ سَالِمِ بْنِ شَوَّالٍ، أَنَّ أُمَّ حَبِيبَةَ، أَخْبَرَتْهُ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَمَرَهَا أَنْ تُغَلِّسَ مِنْ جَمْعٍ إِلَى مِنًى ‏.‏
It was narrated from Salim bin Shawwal that:Umm Habibah told him that the Prophet told her to leave Jam (Al-Muzdalifah) for Mina at the end of the night
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।