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सुनन नसाई

नंबर 3036

नंबर 3036किताब 24, नंबर 419
أَخْبَرَنَا عَبْدُ الْجَبَّارِ بْنُ الْعَلاَءِ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ عَمْرٍو، عَنْ سَالِمِ بْنِ شَوَّالٍ، عَنْ أُمِّ حَبِيبَةَ، قَالَتْ كُنَّا نُغَلِّسُ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مِنَ الْمُزْدَلِفَةِ إِلَى مِنًى ‏.‏
It was narrated that Umm Habibah said:"We used to leave Jam Al-Muzdalifah for Mina at the end of the night, during the time of the Messenger of Allah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।