أَخْبَرَنَا أَبُو دَاوُدَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ، وَعَفَّانُ، وَسُلَيْمَانُ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ مُشَاشٍ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنِ الْفَضْلِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَمَرَ ضَعَفَةَ بَنِي هَاشِمٍ أَنْ يَنْفِرُوا مِنْ جَمْعٍ بِلَيْلٍ .
It was narrated from Ibn Abbas, from Al-Fadl, that:the Prophet commanded the weak ones among Banu Hashim to move on from Jam' (Al-Muzadalifah) at night
स्रोत में दर्ज दर्जे
Hasan Sahih IsnaadAbu Ghuddah
Hasan Sahih IsnaadAl-Albani
Isnaad SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।